बोर्ड परीक्षा की चौकसी सिर्फ कागजों तक सीमित, शोरगुल से स्टूडेंट्स परेशान
जिले के छात्र और छात्राओं की पढ़ाई पर भारी लाउड स्पीकर-डीजे यहां हो रही है अनदेखी

बोर्ड परीक्षा की चौकसी सिर्फ कागजों तक सीमित, शोरगुल से स्टूडेंट्स परेशान
जिले के छात्र और छात्राओं की पढ़ाई पर भारी लाउड स्पीकर-डीजे यहां हो रही है अनदेखी
कटनी, यशभारत। जिले में 10 फरवरी से 12वीं बोर्ड की व 13 फरवरी से 10 बोर्ड की परीक्षायें प्रारंभ हो चुकी है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षायें भी कल 17 फरवरी से प्रारंभ होगीं। प्रशासन द्वारा इन परीक्षाओं की कड़ी निगरानी और अनुशासन के लिए व्यवस्थाओं संबंधी आदेश जारी किए गए हैं। परीक्षा केन्द्रों पर फ्लाइंग स्क्वायड निरीक्षण दल नियुक्त किए गए और समय सीमा पर सख्त निर्देश जारी किए गए है। छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न न हो, इसके लिए कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का सख्ती के साथ पालन कराये जाने के निर्देश भी जिला दण्डाधिकारी की ओर से जारी किए गए हैं, परंतु इन तमाम आदेश और तैयारियों के बीच छात्र हित से जुड़े सबसे अहम मुद्दा पूरी तरह से नजर अंदाज नजर आ रहा है। परीक्षा के दौरान शांति के लिए कोलाहल पर प्रतिबंध के लिए जारी आदेश कागज तक ही सीमित है। 1-2 कार्रवाई को छोड़ दे तो कोलाहल मचाने वाले डीजे तथा लाउडो स्पीकरों पर कार्रवाइयां नहीं हो रही हैं।
शहर में शोर मचाते हुए डीजे
प्रशासन द्वारा इस बात के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि बोर्ड परीक्षाओ के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके बावजूद जिला मुख्यालय सहित जिले के कस्बाई अंचलों में स्थित बिल्कुल उल्ट दिखाई दे रही है। शाम होने के साथ ही सडकों पर निकलने वाली बारातों में बजने वाले डीजे का शोरगुल शहर को ही कंपा रहा है। देर रात तक बारात घरों, मैरिज गार्डनों और होटलो से डीजे का हल्ला गूंजता रहता है। छात्रों का सवाल-नियम सिर्फ हमारे लिए बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में लगे छात्र ध्वनि विस्तारक यंत्रों से परेशान है। छात्रों का कहना है कि हमसे समय पर पहुंचने, अनुशासन रखने और नियम मनाने की अपेक्षा की जाती है लेकिन जब शोर रोकने की बारी होती है तो जिम्मेदारों की आंखे बंद हो जाती हैं।अभिभावकों का भी आरोप है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में प्रशासन की कोलाहल अधिनियम को लेकर निष्क्रियता बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
> शादी समारोह में देर रात तक तेज डीजे बज रहे हैं।
निजी आयोजनों में कानफोडू साउंड सिस्टम
धार्मिक कथायें एवं अनाउंस वह भी बिना अनुमति के
दिन हो या रात लाउड स्पीकर की तेज आवाज बच्चों की पढ़ाई और मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर रही है
आत्म अनुशासन की भी जरूरत
बच्चों की परीक्षायें चल रही हैं। इसके परिणामों पर उनका भविष्य भी निर्भर है। ऐसे में बच्चे और उनके अभिभावक कोलाहल से शांति की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में जिले एवं नगर के लोग जिनके यहां वैवाहिक आयोजन अथवा अन्य कोई निजी आयोजन हैं, उनसे भी उम्मीद की जाती है कि वर्तमान समय में कोलाहल से शोर न हो, इसके लिए आत्म अनुशासन का परिचय देते हुए तेज गति बजने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं करे। धार्मिक आयोजन में भी शोरगुल न हो, यह निश्चित करना चाहिए।







