सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. सुनील सक्सेना के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने ब्रेस्ट ओपीडी के अंतर्गत भर्ती हुए ब्रेस्ट कैंसर बीमारी से ग्रसित एचआईवी पॉजिटिव महिला कि सर्जरी की।
समाज में एचआईवी/एड्स को लेकर व्याप्त भ्रांतियों के कारण अक्सर मरीजों को पारिवारिक सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, लेकिन बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के जनरल सर्जरी विभाग ने एक बार फिर साबित किया है कि चिकित्सा सेवा में भेदभाव का कोई स्थान नहीं।
विभाग ने बिना किसी हिचकिचाहट के एक एचआईवी पॉजिटिव मरीज की स्तन कैंसर (चतुर्थ स्टेज) की अत्यंत जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। विगत दिनों मोडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टमी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. सुनील सक्सेना के नेतृत्व में डॉ. अखिलेश रत्नाकर एवं डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
डॉ. सुनील सक्सेना ने कहा, “एचआईवी संक्रमित मरीजों का उपचार हमारा कर्तव्य है। यूनिवर्सल प्रिकॉशन अपनाकर सभी सर्जरी सुरक्षित की जा सकती हैं। हालांकि, पूर्ण सुरक्षा उपकरणों के कारण ऑपरेशन के दौरान सर्जन को कुछ देर बाद सांस लेने में कठिनाई एवं पसीना आना सामान्य है, फिर भी हमारी टीम की निष्ठा से सभी चुनौतियों का सामना किया जाता है। बीएमसी में मरीज बेहतर एवं निःशुल्क इलाज करवा सकते हैं। बीएमसी सागर संभाग का इकलौता कार्यशील मेडिकल कॉलेज होने के नाते सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने एवं सभी मरीजों को समान सेवा प्रदान करने के प्रति प्रतिबद्ध है। विभाग ने अब तक दर्जनों एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की सफल सर्जरी कर चुका है, जो चिकित्सकों की पेशेवर क्षमता एवं मानवीय संवेदनशीलता का प्रतीक है।
मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने बताया कि मरीज में कैंसर ऊतक छाती की मांसपेशियों से गहराई से चिपका हुआ था, जिसे दो घंटे के सूक्ष्म डिसेक्शन के बाद पूर्ण रूप से अलग किया गया। संक्रमण के जोखिम को ध्यान में रखते हुए सर्जरी टीम ने यूनिवर्सल प्रिकॉशन प्रोटोकॉल का कठोर पालन किया – पूर्ण प्लास्टिक गाउन, कैप, मास्क, चश्मा एवं दस्ताने धारण कर सिर से पैर तक सुरक्षित रहते हुए ऑपरेशन किया। सर्जरी की एक और चुनौती यह थी कि मरीज को ब्लड प्रेशर की समस्या थी। अतिरिक्त ब्लीडिंग रोकने हेतु एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. सर्वेश जैन एवं डॉ. अजय सिंह ने हाइपोटेंसिव एनेस्थीसिया तकनीक का सफल उपयोग किया, जिसमें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित निम्न स्तर पर रखा गया। परिणामस्वरूप सर्जरी बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और मरीज वर्तमान में पूर्णतः स्वस्थ है तथा नियमित फॉलो-अप पर है।