फिर शुरू हुआ मुरूम का अवैध उत्खनन, लगातार सामने आ रहीं शिकायतें, धरती का सीना चीरकर सरकार को पहुंचा रहे राजस्व की हानि

कटनी, यशभारत। जिला मुख्यालय से लगे इलाकों में एक बार फिर मुरूम सहित अन्य खनिज के अवैध उत्खनन की शिकायतें सामने आने लगी है। आलम यह है कि दिन हो या रात, खनन माफिया धरती का सीना चीरकर खुलेआम अवैध उत्खनन करते हुए राज्य सरकार को राजस्व की हानि पहुंचा रहा है। अब सरकारी निर्माण कार्यों के लिए भी अवैध उत्खनन के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला कटनी जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम देवराखुर्द सडक़ निर्माण का सामने आया है, जहां सडक़ के निर्माण के लिए चोरी की मुरूम का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम मढ़ई से ग्राम देवराखुर्द तक सडक़ का निर्माण किया जा रहा है, जिसमे आसपास के क्षेत्रों से उत्खनन कर लाई जा रही मुरूम को डाला जा रहा है। अवैध उत्खनन के चलते सडक़ के दोनों ओर खाईनुमा गड्ढे बन गए हैं। इसी तरह एस एन कंस्ट्रक्शन कटनी द्वारा राधा सत्संग भवन से गुलवारा रोड तक सडक़ निर्माण के नाम पर महिला कॉलेज कटनी के सामने से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। उत्खनन की गई मिट्टी-मुरुम को उसी सडक़ निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। इस मामले में जिला खनिज अधिकारी की लापरवाही सामने आई है, जो शिकायत के लिए फोन करने पर फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध उत्खनन पर तत्काल कार्रवाई की जाए और दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज की जाए।
नेशनल हाईवे में भी अवैध उत्खनन
राष्ट्रीय राजमार्ग की बात करें तो यहां भी धड़ल्ले से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आई कि पीरबाबा से चाका तक फोरलेन बायपास निर्माण कार्य में सडक़ के दोनों ओर खुलेआम मुरूम का अवैध उत्खनन किया गया। शासकीय भूमि में दिनदहाड़े अवैध रुप से पोकलेन के माध्यम से मुरुम उत्खनन कर हाइवा के माध्यम से परिवहन भी किया गया। इसके बाद भी खनिज विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। शासन के निर्देशानुसार शासकीय भूमि में मुरुम उत्खनन के लिए खनिज विभाग एवं राजस्व विभाग से अनुमति लेकर एवं रायल्टी पर्ची जारी करने के पश्चात मुरुम उत्खनन किये जाने का प्रावधान है, लेकिन ठेकेदार द्वारा नियमों का उल्लंघन कर बेखौफ होकर दिन रात राष्ट्रीय राजमार्ग में शासकीय भूमि में पोकलेन मशीन के माध्यम से विगत अवैध रुप से मुरुम का उत्खनन एवं परिवहन किया गया।
एनजीटी के निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने साफ कहा है कि अवैध रेत खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय खतरा है। ऐसे मामलों में सिर्फ वाहन जब्ती या जुर्माना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अनिवार्य है।







