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पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर हाईकोर्ट सख्त, एडमिशन प्रक्रिया पर रोक जारी

नर्सिंग मामलें में सीबीआई से जाँच अधिकारियों के नाम और रिकॉर्ड तलब, अगली सुनवाई 25 जुलाई को

 

जबलपुर यश भारत।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन प्रक्रिया पर जारी रोक हटाने से इनकार कर दिया है। नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में मान्यता को लेकर गड़बड़ियों पर दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया गया।

 

याचिका में आरोप लगाया गया है कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल ने पिछली दो एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता को भूतलक्षी प्रभाव से बाँट दिया है और कई कॉलेजों ने बिना मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की सम्बद्धता के ही छात्रों को अवैध तरीके से प्रवेश दे दिया। इसके अलावा, एक ही भवन में नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज संचालित होने की बात भी सामने आई है।

 

हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर के पैरामेडिकल कॉलेजों से संबंधित मान्यता के आवेदन और निरीक्षण रिपोर्टें तत्काल कोर्ट में पेश की जाएं। वहीं, पैरामेडिकल काउंसिल ने पक्ष रखते हुए कहा कि मान्यता की प्रक्रिया नियमों और शासन की अनुमति से की गई है, लेकिन कोर्ट ने रोक हटाने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को काउंसिल के जवाब का परीक्षण कर प्रतिवाद प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

 

नर्सिंग कॉलेज में फर्जीवाड़े के आरोपों पर हाईकोर्ट का निर्देश

नर्सिंग कॉलेजों में भी मान्यता प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट गंभीर है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने एक आवेदन प्रस्तुत कर यह मांग की थी कि हाईकोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता को दिए गए सीबीआई जाँच रिकॉर्ड साझा करने के आदेश को बदला जाए। इस पर याचिकाकर्ता ने उदाहरण के रूप में सेंधवा नर्सिंग कॉलेज, बड़वानी का हवाला दिया, जिसे सीबीआई द्वारा ‘सुटेबल’ बताने के आधार पर सत्र 2024-25 की मान्यता दे दी गई, जबकि कॉलेज की फैकल्टी की मार्कशीट फर्जी थी।हाईकोर्ट ने सीबीआई को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सेंधवा नर्सिंग कॉलेज की जांच करने वाले अधिकारियों की सूची सहित पूरी जांच फाइल अगली सुनवाई में कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भले ही रिकॉर्ड लाखों पृष्ठों का हो, उसकी स्कैन कॉपी याचिकाकर्ता को प्रदान की जाए।

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