सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जिले की ग्राम जरूरखेड़ा के पास शक्ति घाटी की पहाड़ी में 16 दिन पहले मिले अज्ञात शव की पहचान के बाद पुलिस ने पुरानी रंजिश के चलते हुई हत्या का खुलासा कर दिया है। नरयावली थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी रूपसिंह राजपूत, शैतानसिंह राजपूत और राजेशसिंह राजपूत को नामजद कर दो को गिरफ्तार कर लिया है जबकि तीसरे आरोपी की तलाश तेज कर दी है।
घटना के संबंध में यश भारत के संभागीय ब्यूरो को मिली जानकारी के अनुसार 25 नवंबर को ग्राम मूडरा जरुआखेड़ा निवासी गोदन पिता स्व. रल्ली रैकवार ने सूचना दी थी कि शक्ति घाटी पहाड़ी पर केम के पेड़ के पास लगभग 40-45 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव पड़ा है। चौकी जरुआखेड़ा में मर्ग क्रमांक 00/2025 दर्ज किया गया। बाद में थाना नरयावली में मामला 55/25 धारा 194 बीएनएसएस के तहत दर्ज कर जांच शुरू हुई।
अंधे कत्ल का मामला होने पर पुलिस ने अज्ञात शव की शिनाख्त के लिए जोरदार प्रयास किए। सोशल मीडिया पर मृतक की तस्वीरें वायरल की गईं, पंपलेट छपवाकर क्षेत्र में चस्पा किए गए। आसपास के जिलों के कंट्रोल रूम, गांवों और थाना क्षेत्रों से संपर्क कर जानकारी जुटाई गई। इन प्रयासों से मृतक की पहचान निरंजन सिंह पिता फूलसिंह राजपूत निवासी सरखड़ी थाना खुरई देहात के रूप में हुई।
मर्ग जांच में साफ हुआ कि पुरानी बुराई के चलते आरोपियों ने निरंजन के सिर पर पत्थर मारकर हत्या कर दी। इसके बाद थाना नारायवली में अपराध क्रमांक 309/2025 धारा 296(बी), 103(1), 115(2), 238(ए), 3(5) बीएनएस दर्ज किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम
पुलिस अधीक्षक सागर विकाश कुमार शाहवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा और अनुविभागीय अधिकारी राहतगढ़ योगेंद्र सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की सूचना पर आरोपी रूपसिंह राजपूत व शैतानसिंह राजपूत निवासी सरखड़ी तथा राजेशसिंह राजपूत निवासी सिलोदा की संलिप्तता सामने आई।11 दिसंबर को रूपसिंह और शैतानसिंह को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। दोनों को जेल भेज दिया गया है। तीसरे आरोपी की धरपकड़ के प्रयास जारी हैं।
इस सफलता में थाना प्रभारी नरयावली निरीक्षक कपिल कुमार लाक्षकार, उपनिरीक्षक आरकेएस चौहान (कंट्रोल रूम), उपनिरीक्षक अनिल कुजूर, सउनि जगन्नाथ यादव, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार (साइबर सेल), प्रआर जितेंद्र दुबे, खेमचंद्र चौधरी, भरत सिंह और आर दिलीप गुर्जर का सराहनीय योगदान रहा। इनकी मेहनत, तकनीकी विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई से अंधे कत्ल की गुत्थी मात्र 16 दिनों में सुलझ गई।