मध्य प्रदेशराज्य

नगर निगम की मनमानी के खिलाफ व्यापारी लामबंद, 9 सितंबर को रहेगा संपूर्ण व्यापार बंद 

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ नगर निगम द्वारा सभी प्रकार के व्यापार और व्यवसाय पर ट्रेड लाइसेंस शुल्क थोपने तथा कचरा कलेक्शन फीस की एकमुश्त वसूली का मामला शहर में तूल पकड़ गया है। इसे लेकर व्यापारी व व्यवसायी संघों ने संयुक्त रूप से मोर्चा खोलते हुए 9 सितंबर को संपूर्ण व्यापार बंद करने का ऐलान कर दिया है।

सागर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री द्वारा पिछले दिनों जारी आदेश के अनुसार शहर के सभी प्रकार के व्यापार एवं व्यवसाय स्थलों पर प्रति वर्ग फुट के हिसाब से ट्रेड लाइसेंस शुल्क लागू किया गया है। इस लाइसेंस के दायरे में गली-मोहल्लों और फुटपाथ से लेकर मुख्य बाजारों और शोरूम तक के छोटे, माध्यम और बड़े व्यापारी, डॉक्टर, क्लीनिक, नर्सिंग होम, टेंट हाउस, चाय-पान की दुकानें, सब्जी-फल के टपरे और हाथ ठेले, लीगल व अन्य सलाहकार सेवाएं तथा कोचिंग संस्थान तक शामिल कर दिए गए हैं।

 

व्यापारी संघ के अध्यक्ष शिखर कोठिया का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की कमर तोड़ने वाला है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और सतना जैसे बड़े शहरों में व्यापारियों के विरोध के कारण यह नियम स्थगित कर दिए गए, जबकि सागर में नगर निगम इसे जबरन वसूल करते हुए छोटे व माध्यम व्यापारियों तथा व्यवसायों को अनावश्यक रूप से परेशान कर उनके प्रतिष्ठानों में तालाबंदी जैसी तानाशाहीपूर्ण कार्यवाही की जा रही है।

 

व्यापारी महासंघ ने चेतावनी दी है कि पहले भी केवल सागर नगर निगम ने निर्यात कर वसूला था, जिसके दुष्परिणाम स्थानीय व्यापार को आज तक भुगतने पड़ रहे हैं। यदि इस बार भी समय रहते विरोध नहीं हुआ तो भविष्य में नगर निगम की मनमानी के आगे व्यापारी समाज को गुलामी झेलनी पड़ेगी।

 

महासंघ ने घोषणा की है कि 9 सितंबर को दोपहर 12 से 2 बजे तक संपूर्ण बाजार बंद रहेगा। इस दौरान सभी व्यापारी कटरा नमक मंडी में एकत्र होकर रैली के रूप में कलेक्टोरेट पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को निरस्त करने की मांग करेंगे। इसके बाद भी सरकार और नगर निगम प्रशासन व्यापारी एवं व्यवसाईयों से अनैतिक वसूली बंद नहीं की जाती है तो संपूर्ण व्यापार और व्यवसाय अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।

 

व्यापारियों ने कहा है कि यह अंतिम अवसर है। यदि अब भी व्यापारी समाज एकजुट होकर आवाज़ नहीं उठाएगा तो आने वाले समय में पछताने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।

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