मध्य प्रदेशराज्य

कृषि प्रक्षेत्र दिवस : एक साथ 200 प्रकार की धान को देख किसान हुए अचंभित

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 सतनाl जिले में आम, केला जैसे फलों और अनाजों की किस्में तो देखने को मिलती हैं। लेकिन जिस तरह यहां 200 से अधिक धान की परंपरागत किस्में संरक्षित हैं। वह क्षेत्र के किसानों के लिए ही नहीं कृषि वैज्ञानिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। यह बात सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने पिथौराबाद में बुधवार को आयोजित जैव विविधता कृषि प्रक्षेत्र दिवस को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए कही।

*देशी किस्मों को अपनाकर किसान उठाए लाभ*

     कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार ने किसानों से कहा कि वे परंपरागत अनाजों का उत्पादन कर कम लागत में अधिक लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि अधिकारियों को परंपरागत अनाज के विस्तार एवं प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए। जैव विविधता प्रबंधन समिति और सर्जना सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मंच पिथौराबाद के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान कृषि वैज्ञानिक कृषि विभाग के अधिकारी जनपद के अधिकारी उपस्थित रहे.।

*परंपरागत बीज के संरक्षण की जरुरत*

      कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने परंपरागत अनाज, सब्जी आदि को बचाए रखने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों का विस्तार से उल्लेख करते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया। परंपरागत खेती को किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। 

        इस दौरान कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस सहित अन्य अधिकारियों ने खेत में पहुंचकर वहां लगी 200 प्रकार की दुर्लभ परम्परागत धान की अलग-अलग किस्मों को देख अचंभित रहे। इसके अलावा बीज बैंक व कृषि आश्रित समाज के दुर्लभ कृषि यह यंत्रों के संग्रहालय का भी अवलोकन किया।

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