मंडला lजिला मुख्यालय से लगभग 78 किमी दूर स्थित सुरेहली वाटरशेड क्षेत्र के सीमांत किसान जन्नू पिता महादेव धुर्वे पहले छोटी जोत और सिंचाई के सीमित साधनों के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। लगभग 0.10 हेक्टेयर भूमि पर पारंपरिक खेती से होने वाली आय परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में शासन की योजना के अंतर्गत ‘कम्प्रेहेंसिव होमस्टेट मॉडल (सीएचएम)’ को अपनाने से उनकी खेती और आय दोनों में सकारात्मक बदलाव आया।
इस मॉडल के तहत उनकी बाड़ी में मल्टी लेयर क्रॉप विकसित की गई। जमीन के निचले स्तर पर अदरक, हल्दी, मेथी, धनिया, पालक और लाल भाजी जैसी फसलें लगाई गईं। मध्य स्तर पर टमाटर और बैंगन की खेती की गई, जबकि ऊपर बांस के मचान पर करेला, सेम और बरबटी उगाई जा रही हैं। बाड़ी की परिधि में फलदार पौधों का रोपण भी किया गया है, जिससे वर्षभर विभिन्न प्रकार की उपज प्राप्त होने लगी है।
जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए बाड़ी में 10×10×7 फीट का जलकुंड बनाया गया है, जिसमें गर्मी के समय भी 15 से 17 हजार लीटर पानी सुरक्षित रहता है। ड्रिप एवं सूक्ष्म सिंचाई पद्धति अपनाने से लगभग 70 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है और कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन मिल रहा है।
कृषक जन्नू धुर्वे बताते हैं कि उन्होंने जैविक खेती की पद्धतियाँ अपनाई हैं। जीवामृत, घनजीवामृत और नीमास्त्र के उपयोग से खेती की लागत कम हुई है और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। इसके साथ ही कम लागत में मुर्गी पालन भी शुरू किया गया है, जिससे नियमित आय का स्त्रोत बन गया है।
जन्नू धुर्वे के अनुसार, केवल चार महीनों (नवंबर से मार्च) में सब्जियों की बिक्री से उन्हें 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। साथ ही इस वर्ष उन्होंने लगभग 8 से 10 क्विंटल हल्दी का उत्पादन भी किया है। यह परिवर्तन कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा एवं सीईओ जिला पंचायत श्री शाश्वत सिंह मीना के निर्देशन तथा जिला परियोजना अधिकारी वाटरशेड श्री उमेश सिंगरौरे के मार्गदर्शन में संभव हो सका। आज जन्नू धुर्वे की बाड़ी आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है और कम्प्रेहेंसिव होमस्टेट मॉडल सीमांत किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह दिखा रहा है।