कटनी

आर्थिक संकट से जूझ रहे गैस एजेंसियों के हॉकर, सुबह होते ही एजेंसियों के बाहर सिलेंडर के लिए लग रही हजारों लोगों की लाइन, शहर में दूर होने का नाम नहीं ले रहा गैस सिलेंडर संकट

कटनी, यशभारत। शहर में गैस सिलेंडर का संकट दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि सुबह होते ही गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर के लिए हजारों लोगों की लाइन लग रही है। कई घंटे तक कतार में लगने के बाद बमुश्किल लोगों को सिलेंडर मिल पा रहा है। होम डिलिवरी बंद होने से उपभोक्ता तो परेशान है साथ ही गैस एजेंसियों के हॉकर भी आर्थिक संकट से जूझ रहे है। नवरात्र पर्व के चलते लोगों की परेशानियां और ज्यादा बढ़ गई हैं। घर-घर कन्या भोजन के आयोजन हो रहे। अष्टमी और नवमी पर भी शहर में जगह-जगह कन्या भोज और विशाल भंडारे के आयोजन होंगे। इसके अलावा रामनवमी और सांई शोभायात्रा के भी आयोजन होने हैं, जिसमे गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होगी, लेकिन समस्या इस बात की है कि सिलेंडर आसानी से नहीं मिल पा रहे। जिससे लोग परेशान नजर आ रहे हैं। मंदिर प्रबंध समितियों के पदाधिकारी भी सिलेंडर की व्यवस्था के लिए जुगाड़ कर रहे। इसके बाद भी लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। प्रशासन गैस सिलेंडर वितरण के लिए अब तक कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं बना पाया है। जिसका खामियाजा लोगों को अपना समय बर्बाद करते हुए लाइन में लगकर उठाना पड़ रहा है।
होम डिलिवरी बंद होने से परेशानी
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों से होम डिलिवरी बंद कर दी गई है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताा को बुकिंग करने के बाद सिलेंडर के लिए एजेंसी तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें अपना काम छोडक़र घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। एजेंसियों में भी सीमित स्टाक है। ऐसी स्थिति में उन्हें कईयों बार बिना सिलेंडर के लौटना पड़ रहा है।
हॉकर भी परेशान, घर का बजट बिगड़ा
शहर में स्थित गैस एजेंसियों में बड़ी संख्या में हॉकर काम करते हैं, जो कि एजेंसियों से सिलेंडर लेकर उपभोक्ताओं के घर-घर पहुंचाने का काम करते हैं। इससे जो आय होती है, इसी से उनका घर चलता है लेकिन होम डिलिवरी बंद होने से उन्हें भी कई तरह की परेशानी हो रही है। एक हॉकर ने बताया कि पिछले 20 दिनों से उसे एक भी सिलेंडर नहीं मिला है। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया है। आज सुबह 8 बजे एजेंसी पहुंचने के बाद एक भी सिलेंडर नहीं मिला। यही स्थिति रही तो उन्हें दूसरा काम करना पड़ेगा।

 

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