अवैध लेटराइट खनन पर प्रशासन का शिकंजा, रातभर चली कार्रवाई में हाइवा जब्त
बड़ा सवाल ! आख़िर किसके संरक्षण में बेख़ौफ़ हैं खनिज माफ़िया!

कटनी। यशभारत- जिले की विजयराघवगढ़ तहसील ग्राम जमुवानी में लेटराइट खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन का संगठित नेटवर्क प्रशासन के रडार पर आ गया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के सख़्त निर्देशों के बाद खनिज विभाग उपसंचालक रत्नेश दीक्षित के मार्गदर्शन में आधी रात को की गई कार्रवाई में अवैध खनन में लगा एक हाइवा जब्त किया गया, जबकि चालक मौके से फरार हो गया।
सिंडिकेट की खुली पोल
बताया जाता हैं इसी हाइवा से बरही-विजयराघवगढ़-चरी मोड़ रूट से लगातार बिना रॉयल्टी खनिज ढो जा रहा था। स्थानीय खदान संचालकों और परिवहन एजेंटों की मिलीभगत से रात में खनिज बाहर भेजा जाता था। अचानक हुई कार्रवाई से इस नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। अब सिर्फ वाहन नहीं, पूरे सिंडिकेट की जांच शुरू हो चुकी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर ने जिला टास्क फोर्स की बैठक में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध योजनाबद्ध और रात्रिकालीन कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। कटनी से बड़वारा-विलायतकला मार्ग, बड़वारा, रोहनिया, बसाड़ी, बरही मार्ग पर खनिज वाहनों की कड़ी जांच की गई। देर रात करीब 2 बजे बरही-विजयराघवगढ़ मार्ग पर चरी मोड़ भटूरा क्षेत्र के पास जमुवानी में अवैध रूप से लेटराइट की खुदाई कर परिवहन करते एक हाइवा को पकड़ा गया।
खनिज अमले ने स्थानीय खदान संचालकों की मदद से वाहन को पुलिस थाना कैमोर की सुपुर्दगी में सौंपा। इस अभियान में उपसंचालक खनिज रत्नेश दीक्षित, सहायक खनिज अधिकारी पवन कुशवाहा, खनिज निरीक्षक कमलकांत परस्ते, सिपाही ज्ञानेन्द्र सिंह, सुशील सिंह एवं रमाकांत गर्ग की भूमिका रही। जिले के मुख्य मार्गों पर एक साथ चली इस चेकिंग कार्रवाई से अवैध खनन और परिवहन से जुड़े तत्वों में अफरा-तफरी मच गई है।
सवाल और चेतावनी:
अब सवाल उठ रहे हैं कि बिना संरक्षण के इतनी निर्बाध आवाजाही कैसे संभव थी? क्या चालक को पहले से सूचना मिली थी? अवैध उत्खनन रात के निश्चित घंटों में ही क्यों किया जाता था? यह एक सुव्यवस्थित नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसमें खदान, ट्रांसपोर्ट और निगरानी से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
प्रशासन की यह कार्रवाई सिर्फ एक हाइवा की जब्ती नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के लिए चेतावनी है जो रात के अंधेरे में सरकारी संसाधनों की लूट में लगा है। प्रशासन जल्द ही वाहन मालिक, खदान संचालक और रूट मैनेजमेंट की जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है।







