मिसिंग मिस्ट्री का खुलासा , अर्चना ने खुद बताई ये पूरी कहानी, घर वाले शादी करना चाहते थे जिसके लिए नहीं थी तैयार, खुद बनाया गायब होने का प्लान

कटनी, यशभारत। रेल पुलिस अधीक्षक राहुल लोढ़ा ने आज दोपहर भोपाल में बताया कि अर्चना तिवारी ने ही अपने लापता होने का प्लान बनाया था। अर्चना के परिजनों ने उसकी शादी तय कर दी थी लेकिन वो शादी नहीं करना चाहती थीं इसलिए उसने सारांश के साथ मिलकर भागने का प्लान बनाया। उसका कहना था कि जब तक वह सिविल जज नहीं बन जाती तब तक शादी नहीं करेगी। इस मामले में एक अन्य व्यक्ति तेजिंदर ने भी अर्चना की मदद की। अर्चना रक्षाबंधन पर घर नहीं आना चाहती थी लेकिन वो ट्रेन में सवार हुई और अपने पुराने क्लाइंट तेजिंदर को फोन लगाकर कहा कि वो इटारसी में उतरकर वापस इंदौर जाना चाहती है। जिस पर तेजिंदर नर्मदापुरम से ट्रेन में सवार हो गया और इटारसी स्टेशन पर जहां कैमरे नहीं थे वहां से अर्चना ट्रेन से उतरकर सारांश के पास चली गई।
पुलिस ने बताया कि 7 अगस्त को अर्चना घर जाने के लिए नर्मदा एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थी, लेकिन कटनी नहीं पहुंची। उसके भाई अंकुश तिवारी द्वारा 08.08.2025 को थाना जीआरपी कटनी में आकर अपनी बहन अर्चना तिवारी के गुम होने सूचना दी गई जिस पर जीआरपी थाना कटनी द्वारा शून्य पर गुम इंसान की कायमी कर डायरी भोपाल भेज दी गई। रेल पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रेन 18233 के रिर्ववेशन चार्ट एवं संबंधित स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों के रिर्जवेशन चार्टों को प्राप्त कर जांच की गई। उक्त कोच में गुम महिला के आसपास के यात्रियों के घर जाकर पूछताछ की गई तथा साथ ही सरदही थानों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त की। पुलिस के मुताबिक रेलवे स्टेशन इंदौर, भोपाल, सीहोर, रानी कमलापति, नमर्दापुरम, इटारसी, पिपरिया, करेली, नरसिहपुर, जबलपुर, कटनी, बिलासपुर तक व शहरों में लगे लगभग 2 हजार सीसीटीव्ही फुटेजो को खंगाले गये। नर्मदा नदी में लगभग 32 किलोमिटर तक एसडीआरएफ एवं जीआरपी द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। रानी कमलापति से जबलपुर तक अलग-अलग टीमें बनाकर पैदल सर्चिग कराई गई। बरखेड़ा से बुदनी तक वन विभाग के साथ जीआरपी की टीमों के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, बाद इलेक्ट्रोनिक संसाधानों के माध्यम से संदेही के नम्बर की जानकारी प्राप्त की गई। जिस पर से इंदौर एवं शुजालपुर में संदेही की पहचान सारांश लोककचंद के रूप में की गई। पुछताछ में अर्चना तिवारी से सम्पर्क कर नेपाल बॉर्डर धनगढ़ी जिला लखिमपुर खीरी उ.प्र. से बरामद करने में सफलता हासिल की गई। पुछताछ में अर्चना तिवारी ने बताया की मेरे घर वाले मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे लिए शादी के रिश्ते देख रहे थे कुछ दिन पहले मेरे घरवालों द्वारा बताया गया की तुम्हारे रिश्ते के लिये एक पटवारी लड़का देखा है। और इसी प्रकार बार-बार शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे जिस कारण से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। 07.08.2025 को में इदौर से कटनी के लिए ट्रेन 182.33 इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस से रवाना हुई किन्तु मानसिक रूप से घर जाने के लिए तैयार नहीं थी। रक्षाबंधन के कारण में घर जाने के लिए रवाना हो गई परंतु मैंने सोच लिया की में अब घर नहीं आऊंगी और न ही शादी करूंगी। जब तक में सिविल जज नहीं बन जाती। अर्चना ने बताया रेलवे स्टेशन इटारसी पहुंचने से पहले मैने अपने पुराने क्लाइंट तेजेन्दर सिंह जो पंजाब का रहने वाला है वर्तमान में इटारसी में रहता है, उससे मदद मांगी की मुझे इटारसी उतरकर वापस इंदौर जाना है, फिर मैंने अपने दोस्त सारांश को भी फोन लगा कर इटारसी मुल्य लिया था, मैने इटारसी उतरने से पूर्व ही तेजेंटर को बता दिया था कि जहां इटारसी स्टेशन पर कैमरे न लगे हो वहां उतार लेना, फिर तेजेंदर नमर्दापुरम स्टेशन से मेरे साथ हो गया। तेजेंदर ने मुझे इटारसी में मेरे दोस्त साराश के साथ भेज दिया और तेजेंदर इटारसी में रुक गया था । फिर में सारांश के साथ उसकी कार में बैठकर शुजालपुर आ गई थी। शुजालपुर से इंदौर निकल गई थी इंदौर में घरवालो के आ जाने के डर के कारण विचार के उपरांत में हैदराबाद चली गई।हैदराबाद में 2-3 दिन रुकने के उपरांत पेपर एवं मीडिया रिपोर्ट से मुझे यह जानकारी मिली गई थी मेरा केस काफी चर्चित हो गया है , इस वजह से मैं सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी। इस वजह से सारांश के साथ 11.08 2025 को हैदराबाद से दिल्ली पहुंच गई और दिल्ली से टेक्सी से सारांश के साथ धनगुही नेपाल पहुंच गई। यहां से धनगुदी से काठमांडू पहुंच गई जहां सारांश ने अपने परिचित वायपी देवकोटा से बात कराकर किसी होटल में रूकवाया और सारांश वापस इंदौर चला गया। कुछ दिन बाद देवकोटा ने मुझे एक नेपाल की सिम दिलवा दी थी किससे में वाट्सअप के माध्यम से सारांश से बात करती रही। सारांश और तेजेंदर ने दोस्त होने के कारण मैरी मदद की थी जिससे में नेपाल तक पहुंच गई थी किसी भी व्यक्ति द्वारा मेरे साथ कोई गलत हरकत की गई ना ही गलत काम किया गया था। सारांश माध्यम से पुलिस ने मुझसे संपर्क किया ओर बताया कि आपके परिवार वाले बहुत परेशान है वापस आ जाओ। बाद में काठमांडू से प्लेन से धनगुड़ी आई। बाद धनगुदी से नेपाल बॉर्डर लखीमपुरी पहुंची जहां पर मध्यप्रदेश जीआरपी पुलिस की भोपाल टीम के साथ जीआरपी थाना कमलापति आ गई।








