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ट्रिब्यूनल ने पलटा ED की कार्रवाई को बताया अवैध, प्रफुल पटेल को वापस मिला 180 करोड़ का घर

मुंबई की एक अदालत ने प्रफुल पटेल को शनिवार 8 जून को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत दी। कोर्ट ने ईडी को प्रफुल पटेल की 180 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त करने के आदेश को रद्द कर दिया । तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेर अधिनियम (SAFEMA) से निपटने वाले ट्रिब्यूनल ने इस मामले में आदेश जारी किया। टिब्यूनल ने ईडी की कार्रवाई को अवैध करार दिया।

ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्ति
ईडी ने पहले दक्षिण मुंबई के वर्ली में स्थित प्रफुल पटेल और उनके परिवार के स्वामित्व वाले सीजे हाउस की 12वीं और 15वीं मंजिलों को जब्त किया था। करीब 180 करोड़ रुपए की कीमत वाले ये अपार्टमेंट प्रफुल पटेल की पत्नी वर्षा और उनकी कंपनी मिलेनियम डेवलपर के नाम पर पंजीकृत हैं। वित्तीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ये संपत्तियां हाजरा मेमन से अवैध रूप से हासिल की गई थीं, जो ड्रग माफिया और गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के दाहिने हाथ इकबाल मिर्ची की पत्नी थी।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने ED के कुर्की आदेश को खारिज करते हुए कहा कि प्रफुल पटेल के खिलाफ जांच एजेंसी की कार्रवाई अवैध थी क्योंकि ये संपत्तियां मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल नहीं थीं। ये संपत्तियां इकबाउल मिर्ची से जुड़ी नहीं थीं। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि मेमन और उनके दो बेटों की सीजे हाउस में 14,000 वर्ग फुट की संपत्ति अलग से कुर्क की गई थी। इसलिए, पटेल की बाकी 14,000 वर्ग फुट की संपत्ति को दोबारा कुर्की की जरूरत नहीं थी, क्योंकि यह अपराध की आय का हिस्सा नहीं है।

संजय राऊत ने साधा सरकार पर निशाना
राज्य में विपक्ष ने ट्रिब्यूनल के फैसले पर तीखी आलोचना की है। राज्यसभा में उद्धव ठाकरे की शिवसेना का प्रतिनिधित्व करने वाले संजय राउत ने कहा कि यह घटनाक्रम ईडी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर देता है। उन्होंने कहा, “अब यह स्पष्ट हो गया है कि ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) दोनों ही भाजपा के अंग हैं।”

प्रफुल पटेल ने किया था अजित पवार का समर्थन
प्रफुल पटेल, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के नेता हैं। वह राज्यसभा में एनसीपी के सदस्य हैं। अजित पवार ने जब बीते साल अपने चाचा शरद पवार से बगावत की थी तो प्रपुल पटेल ने उनका साथ दिया था। इस बगावत के बाद एनसीपी दो समूहों में बंट गई थी। इसके बाद अजित पवार ने राज्य में भाजपा-शिंदे सेना सरकार को समर्थन दिया। इसके बदले अजित पवार को महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम बनाया गया।

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