जबलपुरमध्य प्रदेश

वर्ष 2003 में बंद हुई थी रेलवे लाइन. यश भारत की खबर के बाद जागा रेल प्रशासन

मदन महल स्टेशन से टेलीकॉम फैक्ट्री तक बिछी रहस्यमयी रेल लाइन के मामले से उठा पर्दा,टेलीकॉम फैक्ट्री के अधीनस्थ है यह संपत्ति,

जबलपुर यशभारत । यश भारत की लगातार उठाई जा रही खबरों का बड़ा असर हुआ है। मदन महल स्टेशन से टेलीकॉम फैक्ट्री तक बिछी रहस्यमयी रेल लाइन के मामले में आखिरकार रेलवे प्रशासन जाग गया है। वर्षों से गुम रिकॉर्ड और विभागीय अनजानगी के कारण यह करोड़ों की संपत्ति सवालों के घेरे में थी, लेकिन अब जांच के बाद खुलासा हुआ है कि यह सम्पत्ति वास्तव में टेलीकॉम फैक्ट्री की है, जो वर्ष 2003 में बंद कर दी गई थी।सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री के संचालन के दौरान मदन महल स्टेशन से माल और सामग्री की ढुलाई के लिए यह रेल लाइन बिछाई गई थी।

खंगालनी पड़ी पुरानी फाइलें

फैक्ट्री बंद होने के बाद रेलवे ने इस संपत्ति का रिकॉर्ड अद्यतन नहीं किया, जिससे वर्षों तक यह लाइन विभागीय फाइलों में “अज्ञात संपत्ति” के रूप में पड़ी रही। यश भारत ने इस रहस्यमयी लाइन की वास्तविकता और जिम्मेदारी का मामला उठाया था जिसके बाद पमरे मुख्यालय और जबलपुर रेल मंडल के अधिकारियों ने फाइलें खंगालनी शुरू कीं। जांच में सामने आया कि यह भूमि और रेल लाइन टेलीकॉम फैक्ट्री के अधीन है।

रेलवे विभाग में मची खलबली

रेल सूत्रों का कहना है कि यश भारत की खबर ने विभाग को झकझोर कर रख दिया। अधिकारी अब इस तरह की पुरानी संपत्तियों का सर्वे करने की तैयारी में हैं ताकि भविष्य में करोड़ों की संपत्ति यूं ही बेकार न पड़ी रहे। गौरतलब है कि वर्ष 2003 से यह रेल लाइन न सिर्फ जर्जर हो चुकी थी बल्कि कई जगह अतिक्रमण का शिकार भी रही। अब रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सम्पत्ती टेलीकॉम फैक्ट्री के अधीन है। और उसकी पूरी जवाबदारी उसी की है।उल्लेखनीय है कि यश भारत की खबर से न केवल वर्षों से दबी फाइल खुली बल्कि यह भी साबित हुआ कि यदि पत्रकारिता ईमानदारी से मुद्दे उठाए तो प्रशासन को जवाबदेह होना ही पड़ता है।

रेलवे ने यह दी पूरी जानकारी

मदन महल स्टेशन से टेलीकॉम फैक्ट्री तक की रेलवे लाइन टेलीकॉम फैक्ट्री की थी । किसी भी सरकारी या निजी फैक्ट्री में बने मॉल के परिवहन हेतु प्लांट के अंदर रेल लाइन का निर्माण संबंधित संस्थान के खर्चे पर किया जाता है एवं भूमि तथा ट्रैक का स्वामित्व संबंधित संस्थान का होता है। परिचालन की अवधि में रेलवे द्वारा अनुरक्षण प्रभार इत्यादि लिया जाता है। यह लाइन पश्चिम मध्य रेल के गठन (2003) से पूर्व ही बंद हो गई थी। इसके पूर्व तत्कालीन मध्य रेल मुख्यालय मुंबई के द्वारा इसका अनुबंध प्रारंभ एवं समाप्त किया गया था। वर्तमान में मंडल कार्यालय वाणिज्य विभाग में इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

प्राइवेट /सरकारी फैक्ट्री में रेलवे लाइन डालने के उद्देश्य संबंधित संस्थान द्वारा उनके मॉल का परिवहन करना होता है। इससे रेल विभाग को मॉल भाड़ा एवं अनुरक्षण प्रभार इत्यादि प्राप्त होता है।मदन महल स्टेशन पर रेलवे बाउंड्री के बाहर की संपत्ति राज्य/केंद्र सरकार के संबंधित विभाग की होती है। रेलवे भूमि का सीमांकन एवं चिन्हांकन स्पष्ट रूप से किया गया है एवं रेल भूमि के बाहर अन्य किन किन सरकारी विभागों की भूमि है इसका विवरण जिला रिवेन्यू रिकॉर्ड में देखा जा सकता है। रेलवे द्वारा कदम उठाने का प्रश्न ही नहीं उठता है क्योंकि यह लाइन रेलवे की नहीं है। टेलीकॉम फैक्ट्री और रेलवे के बीच का समझौता तत्कालीन मध्य रेल मुख्यालय मुंबई के द्वारा हुआ था एवं उसका टर्मिनेशन भी पश्चिम मध्य रेल के गठन के पूर्व हो गया था।

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