जबलपुरभोपालमध्य प्रदेशराज्य

महाकौशल काॅलेज का नाम बदला अब आचार्य रजनीश के नाम से मिलेगी पहचान

आरडीयू ने सारे दस्तावेजों में बदला नाम

जबलपुर, यशभारत। एक साधाहरण परिवार में जन्में आचार्य रजनीश ओशो ने देश में नहीं पूरे विश्व में एक अलग पहचान बनाई। अब शासकीय महाकौशल महाविद्यालय को आचार्य रजनीश के नाम से जाना जाएगा इसके तहत रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने अपने सारे दस्तावेजों में महाकौशल काॅलेज का आचार्य रजनीश के नाम से अंकित कर दिया है।

मालूम हो कि शासकीय महाकोशल कला एवं वाणिज्य कॉलेज के नाम में ओशो जोड़ने को लेकर जो प्रस्ताव मई 2023 में जिला योजना समिति की बैठक में रखा गया था। उस पर मार्च 2024 में शासन से अनुमति मिलने के बाद रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) ने संबद्धता (एफिलेशन) रिकार्ड में नाम सुधार कर लिया है।

12 साल किया अध्यापन
आचार्य रजनीश अर्थात ‘ओशो’रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय कला एवं वाणिज्य कॉलेज में प्रोफेसर थे। ओशो ने इस महाविद्यालय में 1958 से लेकर 1966 तक विद्यार्थियों को पढ़ाया है। ओशो जिस वृक्ष के नीचे अपनी कार पार्क करते थे, नौकरी छोड़ने के पश्चात वह वृक्ष सूख गया। इस रहसयमयी घटना की चर्चा सारी यूनिवर्सिटी में रही। ओशो ने 23 सितंबर 1957 में रायपुर संस्कृत कॉलेज में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में सेवा आरंभ की थी। करीब 8 महीने बाद उनका स्थानांतरण जबलपुर हो गयाथा। जहां उन्होंने अपनी शिक्षण करियर को जबलपुर विश्वविद्यालय के अतंर्गत शासकीय महाकौशल महाविद्यालय में जारी रखा। यह यूनिवर्सिटी अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के नाम से जानी जाती है। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं और ध्यान शिविरों पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने के लिए 18 मार्च 1966 को विश्वविद्यालय से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

11 दिसंबर 1931 को हुआ जन्म
आचार्य रजनीश ओशो 11 दिसंबर, 1931 को मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा में उनका जन्म हुआ था। जन्म के वक्त उनका नाम चंद्रमोहन जैन था, उन्होंने अपनी पढ़ाई जबलपुर में पूरी की और बाद में वो जबलपुर यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के तौर पर काम करने लगे. उन्होंने अलग-अलग धर्म और विचारधारा पर देश भर में प्रवचन देना शुरू किया. उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि कोई भी इसके असर में आए बिना रह नहीं पाता था. प्रवचन के साथ ध्यान शिविर भी आयोजित करना शुरू कर दिया. शुरुआती दौर में उन्हें आचार्य रजनीश के तौर पर जाना जाता था. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने नवसंन्यास आंदोलन की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने खुद को ओशो कहना शुरू कर दिया।

इनका कहना है
जिला योजना समिति की बैठक में महाकौशल काॅलेज का नाम बदलने की अनुशंसा की गई थी जिसका प्रस्ताव भोपाल गया जहां से नोटिफिकेशन जारी हुआ इसके बाद विवि ने सारे दस्तावेजों में महाकौशल काॅलेज का नाम परिवर्तित कर दिया है।
प्रो. दीपेश मिश्रा, कुलसचिव आरडीयू

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button