जबलपुरमध्य प्रदेश

500 बेड का कोविड केयर सेंटर तैयार:जनभागीदारी से तैयार अस्थाई अस्पताल

जबलपुर, यशभारत।  कोरोना संकट में जनभागीदारी से प्रशासन ने करमेता में 500 बेड का कोविड केयर सेंटर तैयार किया है। इसमें 50 बेड ऑक्सीजन वाले भी शामिल हैं। एयरकूल्ड वाले इस अस्थाई अस्पताल में शहर भर के शासकीय और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों का परामर्श मिलेगा। रेडक्राॅस के माध्यम से इस अस्पताल का संचालन प्रशासन करेगा। रविवार को सांसद राकेश सिंह ने इसका शुभारंभ किया।

जानकारी के अनुसार जबलपुर में जनभागीदारी से 500 बेड का अब तक का सबसे बड़ा अस्पताल बनाया गया है। डी-मार्ट में तैयार अस्पताल को एयरकूल्ड युक्त बनाया गया है। यहां हल्के लक्षण वाले और इलाज के बाद लगभग ठीक हो चुके कोविड मरीजों को रखा जाएगा। इससे दूसरे मरीजों के लिए बेड की उपलब्धता आसान होगी। कुछ निजी अस्पताल संचालकों ने रेडक्राॅस के माध्यम से जहां 60 लाख रुपए से अधिक की राशि दी है। वहीं सांसद, विधायक ने भी इस कोविड केयर सेंटर के लिए फंड से राशि दी है। यहां कोविड मरीजों के मनोरंजन के लिए एलईडी टीवी भी लगाने का निर्णय लिया गया है।

सांसद ने किया शुभारंभ

कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के मुताबिक सभी जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के सहयोग से यह 500 बिस्तर का कोविड केयर सेंटर बनकर तैयार हुआ। इसमें डॉक्टर के साथ स्टॉफ की व्यवस्था भी रहेगी। इस सेंटर में सभी प्राइवेट अस्पतालों का भी सहयोग मिल रहा है। जनप्रतिनिधयों की मौजूदगी में रविवार को दोपहर तीन बजे सांसद राकेश सिंह ने इसका शुभारंभ किया।

प्राथमिक उपचार के लिए कोविड केयर सेंटर की थी जरूरत
सांसद राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर में जिले के अलावा आसपास के जिलों के मरीजों का भी दबाव है। इस कारण यहां बेड की उपलब्धता को लेकर परेशानी है। 500 बेड के इस कोविड केयर सेंटर के शुभारंभ होने से कोविड मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अस्पतालों में लगभग ठीक होने के बावजूद बेड खाली नहीं हो पाता था।

जनसहयोग से भी इस महामारी से लड़ कर जीतेंगे
ऐसे मरीजों को कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट कराकर दूसरे मरीजों के लिए जगह बनाने में आसानी होगी। वहीं प्रारंभिक लक्षण वाले मरीजों को यहां रहकर इलाज किया जा सकेगा। सभी जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और जनसहयोग से इस 500 बेड के कोविड केयर सेंटर का शुभारंभ हो सका है। इतने बड़े सेटअप को लगातार चलाने के लिए संसाधनों कमी न हो पाए और मरीजों को प्राथमिक इलाज मिल सके इसके लिए जनसहयोग आगे भी जरूरी होगा।

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