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5 मई से वैक्सीनेशन पर संशय बरकरार:MP को मिले सिर्फ डेढ़ लाख डोज; 18+ के लोगों को टीका लगाने की शुरुआत पर फिर संकट

चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग ने कहा- मैन पावर, रिसोर्स तैयार हैं, डोज मिलते ही वैक्सीनेशन शुरू करेंगे

जबलपुर यश भारत। मध्य प्रदेश में 18 से 45 साल तक के लोगों को कोराेना वैक्सीन कब से लगेगी? इसे लेकर शनिवार को देर शाम चल चली हाई लेवल मीटिंग में भी फैसला नहीं हो पाया है। दरअसल, मध्य प्रदेश को सिर्फ डेढ़ लाख डोज ही मिले हैं। ऐसे में वैक्सीनेशन की नई ड्राइव बड़े पैमाने पर शुरू करने को लेकर संशय अब भी बना हुआ है। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वे रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन समेत अन्य मंत्रियों से बात करेंगे।

मंत्रालय सूत्रों ने बताया, भले ही 18 से 45 साल के लोगों के लिए राज्य सरकार को सीधे कंपनी से वैक्सीन खरीदना है, लेकिन किस राज्य को कितने डोज कब सप्लाई होंगे, यह केंद्र सरकार को तय करना है। ऐसे में अब मुख्यमंत्री रविवार को केंद्र से मप्र को ज्यादा डोज उपलब्ध कराने को लेकर बात करेंगे।

सरकार ने कोविशील्ड के 45 लाख और कोवैक्सिन के 10 लाख डोज के ऑर्डर दिए हैं, लेकिन अभी डिलीवरी नहीं हुई है। हालांकि शुक्रवार रात हैदराबाद से प्रदेश में कोवैक्सिन के डेढ़ लाख डोज पहुंचे हैं। अब संभावना है कि सरकार 5 मई को वैक्सीनेशन पार्ट-3 की औपचारिक शुरुआत कर सकती है। क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसा ही किया है। बैठक से पहले चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा था, मैन पावर, रिसोर्स तैयार हैं। डोज मिलते ही वैक्सीनेशन शुरू करेंगे।

77 हजार लोगों ने करवाया रजिस्ट्रेशन

वैक्सीन के डोज उपलब्ध नहीं होने के कारण सरकार ने प्रदेश में 1 मई से वैक्सीनेशन टाल दिया था, जबकि वैक्सीनेशन पार्ट-3 के पहले दिन टीका लगवाने के लिए प्रदेश में 77 हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। वैक्सीन की उपलब्धता न होने से वैक्सीनेशन ड्राइव नहीं शुरू हुआ है।

सूत्रों के अनुसार सरकार ‘पहले आओ और पहले पाओ’ की तर्ज पर वैक्सीनेशन शुरू कर सकती है। प्रदेश में वैक्सीनेशन के लिए कोविन पोर्टल और आरोग्य सेतु पर 28 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। एक मई के लिए पूर्व प्रदेश में 77 हजार स्लॉट बुक थे।

स्कूल व कॉलेज परिसरों को बनाया जाएगा सेंटर

सूत्रों का कहना है कि वैक्सीनेशन की नई ड्राइव के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। अभी तक अस्पतालों को सेंटर बनाया गया है, लेकिन 18 से 45 साल तक के लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए स्कूल और कॉलेज परिसरों को सेंटर बनाया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि अस्पतालों में कोरोना के मरीजों की संख्या ज्यादा होने से भीड़ लग रही है। इसलिए नए सेंटर बनाने के लिए स्कूल व कॉलेज परिसरों का चयन किया जा रहा है।

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