जबलपुरमध्य प्रदेश

हनुमानताल के मक्का नगर में दर्दनाक अग्रिकांड : एक मासूम सहित महिला ने तोड़ा दम, करीब आधा दर्जन फंसे लागों को निकाला

 

जबलपुर, यशभारत। हनुमानताल के मक्कानगर गली नंबर सात में एक गद्दा गोदाम में आज अचानक आग लग गयी। जिसमें झुलसने से एक बच्ची और उसकी माँ की दर्दनाक मौके पर ही मौत हो गयी। आग लगने की सूचना के बाद मौके पर पहुंचा ननि अमले ने आग को बमुश्किल काबू किया। अग्रिकांड के दौरान गोदाम की दूसरी मंजिल पर करीब आधा दर्जन लोग फंसे थे, जिन्हें सकुशल बाहर निकाल लिया गया। वहीं, धुंए के उठ रहे गुबारों को देखकर लोग सकते में आ गए और देखते ही देखते घटना स्थल पर लोगों का जमावड़ा लग गया। हादसे की खबर पाकर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू , विधायक लखन घनघोरिया समेत अन्य जनप्रतिनिधि और एसडीएम ऋषभ जैन मौके पर पहुंचे और पीडि़तों को ढांढस बंधाया। वहीं, बचाव दल, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस हादसे ने एक बार फिर दमोहनाका स्थित लाइफ मल्टीनेशनल अस्पताल में हुए अग्रिकांड की यादें ताजा कर दीं।

थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने बताया कि मक्कानगर में दर्दनाक अग्रिकांड हादसा हो गया। जिसकी जांच जारी है। जिसमें एक बच्ची और उसकी मां की आग में जलने से मौत हो गयी। बाकी अन्य लोग छत में फंसे थे जिन्हें निकाल लिया गया है। खबर लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन का बचाव कार्य जारी है।

फायर बिग्रेड समय पर पहुंचती तो बच जाती जानें


वहीं, घटना के दौरान संजय गांधी बार्ड पार्षद मोहम्मद कलीम खान ने कहा कि आग लगने की सूचना समय पर देने के बाद भी मौके पर नगर निगम का फायर बिग्रेड अमला नहीं पहुंचा। धुएं के गुबार उठने के बाद आसपास के लोगों ने जैसे तैसे आग पर काबू पाने का प्रयास किया। जिसके बाद फायर बिग्रेड पहुंचा। यदि समय पर अमला पहुंच जाता तो दो जानें नहीं जाती।

मजदूरी करती थी मां
बताया जा रहा है कि गद्दा गोदाम अशरफ मंसूरी के भाई का है। यहां रोज की तरह ही नगीना 25 वर्ष अपनी बच्ची 6 वर्षीय हिना को लेकर काम पर आती थी। अचानक हुए अग्रिहादसे में दोनों की दम घुटने और आग से जलने के कारण मौत हो गयी। अन्य को सकुशल बचा लिया गया है।

लखन घनघोरिया ने कहा- तुरंत मुआवजे की करें व्यवस्था


वहीं घटना स्थल पहुंचे पूर्व मंत्री एवं विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि यह हृदय विदारक हादसा है। यदि आग शॉट सर्किट से लगी है तो विद्युत विभाग का कितना दोष है, यह निश्चित होना चाहिए और दोष पाए जाने पर उन पर कार्यवाही होना चाहिए। साथ ही पीडि़तों को तुरंत मुआवजा देकर राहत पहुंचाई जानी चाहिए।

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