जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

सड़क पर उतरे अतिथि शिक्षकों ने कहा – पूर्व मुख्यमंत्री ने किए थे वादे नहीं हुए पूरे

सरकार की दोगली नीतियों के शिकार अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टसर कार्यालय में सौपा ज्ञापन

मंडला। सरकार की दोषपूर्ण और दोगली पक्षपात पूर्ण नीतियों का शिकार अब भी होते आ रहे अतिथि शिक्षकों ने  मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर के हाथ सौपा है। जिला संगठन से संजय सिसोदिया ने बताया है कि अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्य प्रदेश के आवाहन पर अतिथि शिक्षक मंडला परिवार ने भी वर्षों से लंबित समस्याओं के साथ-साथ अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आ रही समस्याओं का शीघ्र निराकरण किये जाने को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा है।

 

ज्ञापन में मांग की गई है, कि 2 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा अतिथि शिक्षकों के हित में की गई घोषणाओं पर अमल जल्द से जल्द किया जाए।

 

जबकि की गई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। फिर भी इनके अमल होने से कुछ तो राहत मिलेगी। इसके साथ यह भी मांग की गई है कि वर्षों से अतिथि शिक्षक का काम करके अधिकतम कार्य अनुभवी हुए अतिथि शिक्षकों को अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले प्राथमिकता दिये जाने आदेश जारी किये जाएं। उनको हर शिक्षा सत्र के पहले भर्ती प्रक्रिया में ना उलझाते हुए पिछले सत्रों में बनी पैनल के अनुसार आमंत्रित कर लिया जाए। जो सरकार की गलत नीतियों का शिकार होते काम से बाहर होते दर-दर भटकते आ रहे हैं उनको भी चिन्हित कर इस सत्र से काम का अवसर दिया जाए। 30 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम देने वाले अतिथि शिक्षकों को बाहर किये जाने के आदेश को वापस लेकर आगे भी काम का मौका दिया जाए।

 

अतिथि शिक्षकों का मानदेय हर महीने समय पर दिया जाए। अतिथि शिक्षक परिवार मंडला से जिला अध्यक्ष पी.डी. खैरवार ने सरकार पर आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव 2023 के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों के हित में वार्षिक अनुबंध शिक्षक भर्ती में कुल पदों का 25 की जगह 50 परसेंट आरक्षण, अधिकतम पांच वर्षों के 20 अंक बोनस, शिक्षा गारंटी गुरुजियों की तरह पात्रता परीक्षा लेकर नियमितीकरण, दो गुना मानदेय जो महीने की सुनिश्चित तारीख को देना तय हो जैसी नाकाफी घोषणाएं की थी। भाजपा की ही सरकार के मुख्यमंत्री मात्र बदल जाने के बाद डॉक्टर मोहन यादव की सरकार दस महीने पूरे होते आने के बाद भी अब तक नजरअंदाज करते आ रही है। विधानसभा चुनाव में वोट बैंक बढ़ाने सिर्फ मानदेय दोगुना करके रिझा लिया गया। शिक्षक भर्ती में भी अतिथि शिक्षकों को लाभ नहीं दिया जा सका है। अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में ही अधिकतम सत्रों तक कार्य का अनुभव प्राप्त किए हुए अतिथि शिक्षकों को अवसर न देकर सरकार अभी भी नए पंजीयन कराने आदेश जारी कराई है, जिसको वापस लिया जाए। इससे नये पंजीकृत लोग और पहले से अतिथि शिक्षकों के रूप में काम करते आ रहे अधिकतम अनुभवियों के बीच प्रतियोगिता होगी और पढ़ाने के कार्य में अनुभवहीन आज की नई पीढ़ी अपने आज के पर्सेंटेज का फायदा उठाकर अतिथि शिक्षक बनने का लाभ उठा ले जाएगी। आखिर वह भी जीवन भर रो-रोकर अतिथि शिक्षक का काम करने जाल में फंस जाएगी।

 

इस तरह वर्षों से अपना अमूल्य समय देते आ रहे अतिथि शिक्षकों को काम से बाहर हो जाना मजबूरी बनती रहेगी। ऐसी नीतियां पिछले सालों से ही चली आ रही हैं। जो दोषपूर्ण नीति हैं। मांग है कि कार्य अनुभवी अतिथि शिक्षकों को ही आवश्यकता अनुसार अतिथि शिक्षक में वरीयता दी जानी चाहिए। वर्तमान में तैयार किये जा रहे ऑनलाईन/ऑफलाईन अनुभव प्रमाण पत्र भी संपूर्ण कार्य दिवसों की गणना करके बनाया जाना चाहिए। प्रायः देखा जा रहा है, कि सरकार के ही नुमाइंदों के द्वारा कम से कम तीन सत्र या दो सौ कार्य दिवसों का ही अनुभव प्रमाण पत्र बनवाकर काम चलाने की समझाइश अतिथि शिक्षकों को दी जा रही है। कहा जा रहा है, कि पूरे कार्य दिवसों का अनुभव प्रमाण पत्र बनवाना आवश्यक नहीं है। सरकार जब भी फायदा देखी तीन सत्र अनुभव के मांगेगी। जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही अधिकतम पांच साल के बोनस अंक देने की बात की थी, जो नाकाफी भी है। क्यों न जितने कार्य दिवस काम किये गये हैं उतने के अनुभव प्रमाण पत्र बनाये जाएं। कम दिनों के आखिरी क्यों। जो नीतिसंगत भी है।

आगे की रणनीति बताते हुए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उदय कुमार झारिया, श्रवण कुमार यादव, हेमराज मसराम और राजू यादव, ऊपासना सिंह ने बताया है, कि सरकार 3 दिन के भीतर लंबित मांगें पूरी नहीं कर पाती है तो संपूर्ण मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षक भोपाल पहुंचकर सरकार का घेराव करने के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन करने बाध्य हो जाएंगे इसके लिए जिम्मेदार सरकार होगी।

 

ज्ञापन के दौरान मुख्य रूप से संजय सिसोदिया, उदयकुमार झरिया, उपासना सिंह, हेमराज मसराम, राजू यादव, कुंती शिवरे, पूर्णिमा धुर्वे, दिलीप साहू, नरेश नंदा, महेश बैरागी, नंदलाल नंदा, लाला झरिया, शालिक मरावी, धरम सिंह पूषाम, रामेश्वर प्रसाद, श्रवण झारिया, जाबिर खान, कमलेश बरमैया, अनुभव झारिया, सुनील उईके, रवि बैरागी, संजीवन मार्को, नारेंद्र सैयाम, उमेश्वर मोंगरे, अशोक गुर्जर, प्रेमा बंजारा, सिया बघेल, संजू झरिया, रिखीराम मार्को, धीरज धुर्वे, प्रतापसिंह मार्को, भागचंद मरावी ने जिले भर से पहुंचे अतिथि शिक्षकों का नेतृत्व किया।

 

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