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शिव ‘राज’ में मंत्री के प्रतिनिधि का कारनामा, जेब में उज्जैन का सरकारी अस्पताल

उज्जैन
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार में कैबिनेट मंत्री मोहन यादव के प्रतिनिधि पर उज्जैन के सरकारी अस्पताल के प्रभारी ने बड़ा आरोप लगाया है। प्रभारी डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि खुद को मंत्री का प्रतिनिधि बताने वाले अभय विश्वकर्मा ने उज्जैन के माधवनगर अस्पताल को अपने कब्जे में कर रखा है। अभय पैसे लेकर अपनी पसंद के लोगों को अस्पताल में बेड दिलवाता है। अभय की हरकतों से परेशान होकर प्रभारी ने दूसरे अस्पताल में अपना ट्रांसफर करा लिया। उनके आरोपों के बाद कांग्रेस ने मोहन यादव के इस्तीफे की मांग की है।

प्रभारी डॉक्टर संजीव कुमरावत 25 दिनों तक माधवनगर अस्पताल के प्रभारी रहे, लेकिन चाह कर भी अभय विश्वकर्मा के चंगुल से अस्पताल को मुक्त नहीं करा पाए। उन्होंने अस्पताल में मरीजों की सहूलियत के लिए टोकन सिस्टम शुरू किया, लेकिन अभय पर इसका भी कोई असर नहीं पड़ा। अस्पताल के कुछ स्टाफ भी उसके साथ मिले हुए हैं, जो उसे बेड के खाली होने की जानकारी पहले ही दे देते हैं। अस्पताल को उसने किस तरह अपने कब्जे में ले रखा है, वो इससे पता चलता है कि 95 ऑक्सिजन लेवल वाले मरीजों को आईसीयू बेड मिल जाता है जबकि जिनका ऑक्सिजन लेवल 50 है, उन्हें एक अदद बेड के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

शिकायत मिलने के बाद कुछ समय के लिए माधव नगर अस्पताल में अभय को प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन इससे भी उसके मनमाने रवैये पर कोई असर नहीं पड़ा। डॉ संजीव कुमरावत ने अस्पताल में व्यवस्था सुधारने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए तो नगर निगम कमिश्नर से अपना ट्रांसफर दूसरी जगह करने का आग्रह किया। उन्हें ट्रांसफर मिल भी गया, लेकिन कमिश्नर के साथ उनकी बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और मामले का खुलासा हो गया।

कांग्रेस ने प्रभारी डॉक्टर के आरोपों की जांच के साथ मंत्री मोहन यादव के इस्तीफे की मांग की है। तराना के कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा है कि उन्हें पहले से ही अभय के कारनामे की जानकारी थी और उन्होंने मंत्री को भी इसके बारे में बताया था। परमार ने माना कि माधवनगर अस्पताल में आईसीयू बेड अभय के इशारों पर ही अलॉट होते थे।

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