विभागीय जिम्मेदार नीद में, एसडीएम ने की कार्रवाई, हो रही सराहना : दो नामी होटल सील, भारी मात्रा में मिला शराब का जखीरा

शहडोल/उमरिया। शराब के अवैध विक्रय और परिवहन जैसे विषयों/अपराधों पर कार्रवाई का जिम्मा जिस विभागीय कंधों पर सौंपी गई है, वह जिम्मेदार कंधे या तो कमजोर हो गये हैं या फिर कार्रवाई की जहमत उठाने में नाकाम साबित हैं। ऐसा हम आरोप नहीं लगाते, बल्कि इसका जीता जागता प्रमाण खुद ही प्रशासनिक कार्रवाई ने प्रत्यक्ष रूप से सामने ला दिया है। दरअसल, यह कार्रवाई की गई है जिले के नगर पाली में, जहां अवैध शराब विक्रय पर एसडीएम का चाबुक चला है। एसडीएम मीनाक्षी बंजारे की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय जन सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि, पहली बार किसी अधिकारी ने जमीन पर उतरकर अवैध शराब कारोबार पर सीधा प्रहार किया है।
विदित हो कि, क्षेत्र में एक लंबे अर्से से अवैध पैकारी किए जाने और होटलों/ढाबे की आड़ में शराब परोसे जाने की शिकायतें सामने आ रही थी। बावजूद इसके, आबकारी विभाग चुप्पी साधे बैठा रहा। या यूं कहें कि, मौन साधना में लीन इस विभाग की अनदेखी या संरक्षण में यह कारोबार फलीभूत हो रहा था तो, यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। बहरहाल, एसडीएम के पास पहुंची शिकायत को उन्होंने गंभीरता से लिया और कर्तव्यनिष्ठा के साथ टीम लेकर कारोबारियों पर कार्रवाई कर दिखाया। उनकी इस बड़ी कार्रवाई के बाद से शराब का अवैध कारोबार करने वालों लोगों में प्रशासनिक कार्रवाई का खौफ, एक बार फिर देखने मिल रहा है।
बता दें कि, पाली स्थित गुरुनानक होटल और वीनस होटल को एसडीएम ने सील कर दिया है। जहां भारी मात्रा में शराब पाया गया है। वहीं, नया बायपास स्थित राधा कुंज होटल के पास आनंद सिंह के घर पर भी छापामार कार्रवाई की गई। जिसके बाद अब अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। बताया गया है कि, जिन होटलों दो होटलों को एसडीएम ने सील कर दिया है, वह नगर के नामी होटल हैं, जहां हर प्रकार की शराब और बीयर 24 घंटे बेखौफ अंदाज में काफी समय से अवैध तरीके से बेची जा रही थी। कुछ इसी प्रकार आनंद सिंह नामक व्यक्ति भी शराब बिक्री का कारोबार कर था। इस कार्रवाई ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पाली नगर में लंबे समय से खुलेआम शराब की पैकारी चल रही थी। बिना नंबर की गाड़ियों से दिनदहाड़े शराब की सप्लाई की जाती थी। यह अवैध कारोबार पाली से लेकर घुनघुटी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के किनारे संचालित ढाबों और होटलों तक फैल चुका था।नगर में चर्चा है कि, पूरा अवैध कारोबार मैनेजमेंट के दम पर चल रहा था। लोगों का आरोप है कि, शराब कारोबारियों को संरक्षण मिलने के कारण ही कार्रवाई नहीं हो रही थी। छोटे दुकानदारों और ढाबों में खुलेआम शराब बेची जा रही थी। लेकिन, जिम्मेदार विभाग ने कभी सख्ती नहीं दिखाई। यही वजह है कि, एसडीएम की कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग कटघरे में नजर आ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, अगर प्रशासन पहले ही सख्ती दिखाता तो अवैध शराब का नेटवर्क इतना मजबूत नहीं होता। क्षेत्र में युवाओं के बीच शराब की आसान उपलब्धता, सामाजिक चिंता का बड़ा कारण बन चुकी थी। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में यह धारणा मजबूत होती गई थी कि, शराब ठेकेदारों व विभागीय मिलीभगत से पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि, जब खुलेआम पैकारी हो रही थी, तो आबकारी विभाग और पुलिस आखिर क्या कर रहा था? या फिर विभागीय अधिकारी सबकुछ जानकर भी नजर अंदाज कर रहे थे? क्या पुलिस और आबकारी दोनों ही विभागों का सूचना तंत्र फेल है?







