जबलपुरमध्य प्रदेश

लापरवाही पड़ेगी भारी: पीपीई किट को साफ कर दोबारा किया जा रहा यूज

शहर के कई अस्पतालों में सामने आई लापरवाही

यशभारत संवाददाता, जबलपुर। पीपीई किट यानी पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स। नाम से ही स्पष्ट है कि ऐसे सामान जिससे संक्रमण से खुद को बचाने में मदद मिले। परंतु पीपीई किट को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। शहर के निजी अस्पतालों में में पीपीई किट को साफ कर दोबारा यूज किया जा रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण को आमंत्रण देने के लिए किस तरह से लापरवाही हो रही है।

मालूम हो कि कोरोना वायरस चूंकि संक्रामक बीमारी है इसलिए इससे बचने के लिए लोग मास्क पहन रहे हैं, बार-बार हाथ साफ कर रहे हैं, लोगों से दूरी बनाकर बात कर रहे हैं। आम लोगों तो मास्क और दास्ताने का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन कोरोना मरीजों के इलाज में लगे डॉक्टर, नर्स, कंपाउंडर और मेडिकल स्टाफ को सिर से पांव तक वायरस संक्रमण से बचाव के लिए कई तरह की चीजें पहननी होती हैं और ये सारी चीजें पीपीई किट्स हैं।

हाइड्रो क्लोराइट से साफ हो रही किट
बताया जा रहा है कि शहर के कुछ अस्पतालों में एक पीपीई किट का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। अस्पतालों में हाइड्रो क्लोराइट इस्तेमाल कर पीपीई किट को साफ कर दोबारा यूज किया जा रहा है। जबकि नियम है कि पीपीई किट को सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अस्पतालों में सारे नियमों को दरकिनार पीपीई किट को दोबारा यूज किया जा रहा है।

पीपीई किट इस्तेमाल करने के नियम है
पीपीई किट में जितने भी तरह के सामान आते हैं, सबके इस्तेमाल करने के नियम और तौर-तरीके हैं। हर सामान को पहनने का सही तरीका है। ऐसा नहीं हो तो पहनने के बाद भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ को इस्तेमाल से पहने ये देखना होता है कि किस तरह के पीपीई किट की जरूरत है। फिर उसे कैसे सही तरीके से पहनना है, एडजस्ट करना है, ये भी देखना होता है। इस्तेमाल के बाद पीपीई किट को सही तरह से कचरे में फेंकना ताकि उससे आगे किसी को संक्रमण ना हो, इसका बहुत ज्यादा ध्यान रखना होता है।

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