जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

लाखों के ट्रैफिक सिगनलों की आंखें बंद : दयनीय स्थिति में ट्रैफिक व्यवस्था, बंद पड़े सिग्नल

दमोह यश भारत । किसी भी शहर का विकास वहां के ट्रैफिक व्यवस्था से मापा जाता है लेकिन दमोह में किसी अलसाये अजगर की भांति अधिकारियों ने शहर के प्रमुख चौराहों में सिग्नल तो खड़े कर दिए लेकिन कुछ दिन चलने के बाद वह बंद पड़े हैं इतना ही नहीं जब जिम्मेदार अधिकारियों से इस विषय में बात की गई तो वह भी बगले झांकने लगे।इसके बाद लगता है की दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है..?

 

दमोह शहर एक ऐसा शहर.है कि यहा नियम कायदे कानून सब धरे के धरे रह जाते है यहा ट्रैफिक वयवस्था की बात करे तो स्थिति बहुत ही दयनीय है , प्रशासनिक वयवस्था भी किसी से छुपी नहीं कुछ समय पूर्व लाखो की लागत से ट्रैफिक सिग्नल लगाये गये थे मगर कुछ दिन चलने के बाद वह आज तक चालू नहीं हो सके अभी तक न तो traffic signal मे सुधार हुआ जिससे घंटाघर बकौली चौराहे पर आये दिन जाम जैसे हालात बने रहते है.अब इस पर किसकी जिम्मेदारी बनती है आप ही बताइए।

 

यही होता है,दमोह मे विकास के नाम पर काम तो होते है.मगर इनकी गुणवत्ता पर कोई ध्यान नही देता जिससे काम होने के बाद भी समस्या का हल नही निकल पाता अब देखना होगा की दमोह प्रशासन इस मामले मे कब तक कार्यवाही करता है।

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