जबलपुरमध्य प्रदेश

रामपुर की सुरम्य पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर

जबलपुर यश भारत। शहर में इन दिनों 10 दिवसीय गणेश उत्सव की धूम है जिसके कारण शहर और उप नगरीय क्षेत्र में स्थित गणेश मंदिरों में पूजन अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। शहर से लगे हुए रामपुर की सुरम्य में पहाड़ियों पर करीब सात दशक पुराना भगवान गणेश का एक ऐसा प्राचीन मंदिर है जिसके प्रति श्रद्धालुओं की अगाध आस्था है। यह मंदिर है विद्युत विभाग के मुख्यालय शक्ति भवन के समीप जलपरी के पास।

एक चट्टान पर निर्मित है गर्भग्रह

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वैसे तो आज मंदिर भव्य स्वरूप में है लेकिन जिस समय इस मंदिर का निर्माण हुआ था तो एक पूरी काली चट्टान के ऊपर मंदिर का गर्भग्रह निर्मित किया गया था। यह बात है उस समय की जब मध्य प्रदेश का निर्माण नहीं हुआ था और विद्युत मंडल का मुख्यालय नागपुर हुआ करता था। वर्ष 1957 /58 में मुख्यालय जबलपुर शिफ्ट हुआ और इस समय इस मंदिर के निर्माण की नींव पड़ी। मंदिर के दोनों तरफ बड़ी-बड़ी चट्टान और हरे भरे पेड़ के बीच स्थापित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को प्रकृति की सुखद अनुभूति भी होती है जो उसे आध्यात्मिक के साथ ही मानसिक शांति और सुकून प्रदान करती है। एक बार जो इस मंदिर तक पहुंच जाता है फिर उसकी इच्छा बार-बार इस मंदिर में आने की होती है। वैसे तो शहर में अनेक प्राचीन गणेश मंदिर है लेकिन प्रकृति का जो वातावरण यहां देखने को मिलता है वह और कहीं नजर नहीं आता।
जलपरी के पास प्रवेश द्वार से पहुंचा जा सकता है मंदिर तक
रामपुर विद्युत मुख्यालय के समीप स्थित जलपरी किसी के लिए अनजानी नहीं हो सकती बारिश के दिनों में इसका सौंदर्य बरबस ही लोगों को अपने तक खींचता है। इसी से लगा हुआ है ज्योति क्लब और थी किसके बाजू में स्थित है मंदिर का प्रवेश द्वार। जहां से अंदर जाने पर सुंदर गार्डन के बीच से होकर सीढियो से ऊपर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है जहां विराजित भगवान गणेश के दर्शन कर भक्त धन्य हो जाते हैं।

व्यवस्थाओं और रखरखाव का जिम्मा प्रबंधन समिति के हवाले

मंदिर के रखरखाव सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाओं के लिए बाकायदा एक प्रबंधन समिति गठित की गई है जिसमें विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल है जो व्यवस्थाओं को देखते हैं।वर्तमान में मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे वीरेंद्र कुमार पांडे के अनुसार 1992 से वह मंदिर में नियमित पूजा पाठ करते आ रहे हैं। जिस समय उन्होंने यह कार्य शुरू किया था तब उन्हें समिति की ओर से ₹600 मासिक दिए जाते थे जो अब बढ़कर ₹5000 तक पहुंच गए हैं। मंदिर में होने वाली सभी धार्मिक आयोजन इन्हीं की देखरेख में संपन्न होते हैं वर्तमान में इनके पुत्र के द्वारा भी इनका सहयोग किया जाता है।

निर्धारित है समय

मंदिर समिति के द्वारा दर्शन पूजन के लिए सामान्य दिनों में और आता है 8:00 बजे से 10:00 तक और शाम कुछ 6:00 बजे से 10:00 तक का समय निर्धारित है। लेकिन प्रति माह पडने वाली गणेश चतुर्थी और दूसरे विशेष अवसरों पर हम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सुबह 8:00 से रात्रि 10:30 तक खुला रहता है। प्रतिमाह गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष पूजन की कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।

मंदिर मै की गई है आकर्षक साज सज्जा

वर्तमान में चल रहे 10 दिन की गणेश पर्व के दौरान मंदिर पूरे दिन श्रद्धालुओं के लिए खुला हुआ है। वैसे तो मंदिर में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था है लेकिन इस विशेष अवसर पर मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया है। शाम के वक्त विद्युत साज सज्जा से युक्त यह मंदिर और भी आकर्षण बन गया है। जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग दर्शनों के लिए आ रहे हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि 10 दिवशी गणेश पर्व के समापन अवसर पर 5 सितंबर को यहां एक विशाल भंडारा आयोजित होगा जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करेंगे। वैसे तो मंदिर में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की अच्छी खासी संख्या रहती है लेकिन इस समय भीड़ बढ़ गई है।
सुरक्षा की भी है चाकचौबंद व्यवस्था

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की सुविधा न हो इसके लिए वकायदा मंदिर में सुरक्षा गार्ड तैनात रहते है। जो मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन पार्किंग से लेकर अन्य व्यवस्थाओं पर नजर रखते हैं।

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