जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

यश भारत विशेष : मजदूर का बेटा बना सैनिक, अब  करेगा देश की सुरक्षा, अग्निवीर बन लौटा तो हुआ भव्य स्वागत

नरसिंहपुर ।मजदूर का बेटा जब फौजी बनकर सैनिक की वर्दी में अपने गांव लौटा तो मां की आंखों से खुशी के आंसू छलके बेटे का पुष्पमाला पहन कर स्वागत किया. पूरे गांव में खुशी का माहौल मिलकर किया भव्य स्वागत साथ ही गले लगा कर अपनी खुशियों का इजहार किया.

 

नरसिंहपुर आशीष साहू गोटेगांव एक सच्चाज्ञलक्ष्य, सच्ची लगन और कड़ी मेहनत एक न एक दिन सफलता के मार्ग पर जरूर ले जाती है आपकी जिद्द और जुनून ही आपको मुकाम तक पहुंचाता है. ऐसे ही अथक प्रयास मेहनत कर सफलता के लिए संघर्ष करने वाला मजदूर का बेटा जब फौजी बनकर सैनिक की वर्दी में अपने गांव लौटा तो लोगों लोग खुशी से झूम उठे पुष्पमाला के साथ स्वागत किया भगवान भोलेनाथ को प्रसाद चढ़कर साथ ही गले लगा कर अपनी खुशियों का इजहार किया संघर्ष से सफलता की यह कहानी नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव ग्राम गोटेगांव खेड़ा की है. जहां मजदूर मां-बाप का बेटे ने अग्नि वीर भर्ती में पास होकर 8 महीने की कठिन ट्रेनिंग एवं श्रीनगर में जॉइनिंग के बाद अपने गांव गोटेगांव खेड़ा घर वापस लौटा तो गांव के लोग उसका स्वागत करने घर पहुंचने लगे सैनिक ने घर पहुंचते ही अपने माता पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया मां धनवती बाई ने दीप जलाकर आरती उतार कर बेटे का स्वागत किया वह सैनिक बनने के बाद पहली बार वर्दी में अपने घर पहुंचा है इस मौके पर गोटेगांव खेड़ा सरपंच प्रियंका खेमारिया मिठाई खिलाकर स्वागत शुभकामनाएं दी

मातृभूमि की सुरक्षा के लिए बॉर्डर पर तैनात सैनिक प्रीतम सिंह ठाकुर कहना है कि बचपन से ही 8 वर्ष की उम्र में उसे फौज में भर्ती होने की लगन लग गई थी. पिछले 13 साल से वह सेना में भर्ती होने की सपने देख रहा था. 17 साल की उम्र से ही उसने सेवा में जाने के लिए मेहनत करनी शुरू कर दी थी और पहले ही अटेंप्ट में यह परीक्षा पास कर ली अग्निवीर भर्ती मैं दौड़ और फिजीकल पास की. इसके बाद रिटर्न भी निकाल लिया, ट्रेनिंग होने के बाद देश की सुरक्षा मैं श्रीनगर बॉर्डर पर तैनात रहेगा. पासिंग आउट परेड होने के बाद वह अपने माता-पिता रिश्तेदार परिजनों दोस्तों से मिलने के लिए घर पहुंचा है.

सुबह 5 बजे से करता था तैयारी

युवक प्रीतम सिंह ठाकुर के पिता रामफल ठाकुर बताते हैं कि वह जिन जगहों पर मजदूरी करते थे मेरा बेटा भी वहां साथ में मजदूरी करने जाया करता था और साथ में आपकी तैयारी हो पढ़ाई भी करता रहता था स्कूल से पास होने के बाद उसने आर्मी की तैयारी शुरू की थी. सुबह 5:00 बजे से रनिंग के लिए जाता था, उसकी खुद की मेहनत की वजह से उसने अपने सपने को साकार किया है और इस मुकाम तक पहुंचा है. बेटे की सैनिक बनने पर मुझे गर्व है.

सेना में अनुशासन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और टाइम मैनेजमेंट विशेष जरूरी

अपनी ट्रेनिंग का अनुभव साझा करते हुए प्रीतम सिंह ठाकुर ने बताया कि इस दौरान कई बार उतार चढ़ाव आए, कई विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए मैं अपने लक्ष्य से हटा नहीं आर्मी में सेवा में टाइम मैनेजमेंट और अनुशासन सबसे कीमती होता है. वहां पर एक-एक पल पल का ध्यान रखा जाता है स्वागत कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के उप सरपंच घनश्याम मेहर दीपक ठाकुर एवं ग्रामीण जन उपस्थित रहे

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