जबलपुरमध्य प्रदेश

मेडिकल में नर्सों ने किया हंगामा: एक नर्स की मौत, शव को तिरंगा में लपेटकर अंतिम संस्कार की मांग के साथ 55 लाख और पति को मिले सरकारी नौकरी

सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल में भर्ती थी

यशभारत संवाददाता, जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज में आज सुबह-सुबह उस वक्त हंगामा शुरू हो गया जब एक नर्स की मौत पर नर्स एसोसिएशन ने उसका शव तिरंग में लपेटकर कोरोना योद्धा सम्मान और 55 लाख की सहायता राशि व पति को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग रखी। नर्स एसोसिएशन का कहना था कि 40 वर्षीय नर्स ने पूरी ईमानदारी से अपना फर्ज निभाया और इसी बीच वह कोरोना संक्रमित हो गई।

स्टाफ नर्स को नहीं लगी थी वैक्सीन
मेडिकल डीन प्रदीप कसार ने बताया कि मृतिका नर्स को वैक्सीन नहीं लगाई गई थी। नर्स एसोसिएशन की जो मांगे उस पर विचार किया जाएगा।
अब तक तीन स्टाफ नर्स की मौत
मेडिकल अस्पताल में 40 वर्षीय स्टाफ नर्स की मौत के साथ दो अन्य की मौत भी कोरोना संक्रमण से हो चुकी है।

पति-सास भी कोरोना संक्रमित
नार्सेस एसोसिएशन अध्यक्ष हर्षा सोलंकी ने कहा कि कोरोना से जान गंवाने वाली स्टाफ नर्स की वजह से उनके पति और सास कोरोना की चपेट में आ गए थे। पति की हालत गंभीर हो रही है जिन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीना की मौत के बाद सात साल का बेटा और डेढ़ साल की बेटी के सिर से मां का साया छिन गया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रशासन मरणोपरांत नर्स को कोरोना योद्धा का सम्मान देकर शव को तिरंगा में लपेटकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करे। परिवार के सदस्यों को 55 लाख रुपये मुआवजा देने के साथ परिवार के किसी एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए, ताकि भविष्य में बच्चों के भरण-पोषण में कठिनाई का सामना न करना पड़े।

मृतिका थायराइड और डायबिटीज की मरीज थी
इधर मेडिकल कॉलेज अस्पताल नर्स स्वास्थ संगठन के अध्यक्ष सुनीला इशादीन का कहना है कि महामारी की भेंट चढ़ी स्टाफ नर्स को थायराइड और डायबिटीज की बीमारी थी। उन्हें कोरोना की वैक्सीन भी नहीं लगाई गई थी। कोविड-19 वार्ड में उनकी ड्यूटी लगाई जा रही थी तब उन्होंने अपनी बीमारी और टीकाकरण न होने का हवाला देकर ड्यूटी न लगाने की अपील की थी, जिसे मेडिकल प्रशासन ने अनसुना कर दिया था। सुनीला ने कहा कि कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी करने वाले अमले को क्वॉरेंटाइन अवधि के लिए अलग से विश्राम स्थल और भोजन की व्यवस्था मेडिकल प्रशासन द्वारा नहीं की जा रही है। कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी करने वाला अमला अपने घर पहुंचता है जिसके कारण परिवार के अन्य सदस्य भी महामारी की चपेट में आ रहे हैं।

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