मूंग-उड़द खरीदी केन्द्रों में नहीं आई तेजी, केन्द्रों में पसरा सन्नाटा, बारिश के चलते नहीं पहुंच पा रहे किसान
कटनी, यशभारत। बारिश की वजह से मूंग और उड़द खरीदी केन्द्रों में किसान नहीं पहुंच पा रहे हैं जिसके चलते एक सप्ताह बाद भी केन्द्र सूने पड़े हुए हैं। स्थिति यह है कि 7 जुलाई से खरीदी शुरू हो चुकी हैए लेकिन मूंग बेचने वाले किसानों की संख्या 7 है और उड़द बेचने वाले 55 अन्नदाता हैं। खरीदी के लिए 7 अगस्त तक का समय निर्धारित किया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसम खुलने के बाद खरीदी में तेजी आएगी।
इन जगहों पर चल रही खरीदी
प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति चाका, कैलवाराकला की खरीदी रुचि वेयर हाउस में हो रही है। इसी तरह से आदर्श समृद्धि वेयर हाउस अमुवारी, वेयर हाउस धनगंवा, वेयर हाउस नीमखेड़ा, मंडी प्रांगण उमरियापान, हिन्द एनर्जी और भोलाराम वेयर हाउस स्लीमनाबाद में खरीदी का काम चल रहा है।
कुछ गोदामों में जगह नहीं
कुछ गोदाम ऐसी भी हैं, जहां पर गेंहू या फिर धान भण्डारित है। बारिश का सीजन होने से एक तरफ जहां किसान नहीं पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खरीदी प्रभारी भी उपज के भींगने के डर से किसी तरह का रिस्क नहीं ले रहे हैं। प्रभारियों का कहना है कि जब उपज को सुरक्षित रूप से रखने की जगह होगीए तभी वे उपज रख पाएंगे। काफी आसामान्य स्थितियां बन रहीं हैं।
कटनी, यशभारत। बारिश की वजह से मूंग और उड़द खरीदी केन्द्रों में किसान नहीं पहुंच पा रहे हैं जिसके चलते एक सप्ताह बाद भी केन्द्र सूने पड़े हुए हैं। स्थिति यह है कि 7 जुलाई से खरीदी शुरू हो चुकी हैए लेकिन मूंग बेचने वाले किसानों की संख्या 7 है और उड़द बेचने वाले 55 अन्नदाता हैं। खरीदी के लिए 7 अगस्त तक का समय निर्धारित किया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसम खुलने के बाद खरीदी में तेजी आएगी।
इन जगहों पर चल रही खरीदी
प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति चाका, कैलवाराकला की खरीदी रुचि वेयर हाउस में हो रही है। इसी तरह से आदर्श समृद्धि वेयर हाउस अमुवारी, वेयर हाउस धनगंवा, वेयर हाउस नीमखेड़ा, मंडी प्रांगण उमरियापान, हिन्द एनर्जी और भोलाराम वेयर हाउस स्लीमनाबाद में खरीदी का काम चल रहा है।
कुछ गोदामों में जगह नहीं
कुछ गोदाम ऐसी भी हैं, जहां पर गेंहू या फिर धान भण्डारित है। बारिश का सीजन होने से एक तरफ जहां किसान नहीं पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खरीदी प्रभारी भी उपज के भींगने के डर से किसी तरह का रिस्क नहीं ले रहे हैं। प्रभारियों का कहना है कि जब उपज को सुरक्षित रूप से रखने की जगह होगीए तभी वे उपज रख पाएंगे। काफी आसामान्य स्थितियां बन रहीं हैं।







