उत्तर प्रदेशराज्य

मुरादाबाद में जलती चिताओं के बीच बारी का इंतजार करती रहीं लाशें

 मुरादाबाद                                                                                                        
सुनकर शायद अजीब लगे पर यही सच है। कोरोना का इससे ज्यादा दुर्दांत चेहरा और क्या होगा कि शवों को भी संस्कार के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। मुरादाबाद के लोकोशेड मोक्षधाम में शनिवार को एक-दो नहीं नौ कोरोना संक्रमितों के शव जले। इसके अलावा पांच अन्य शवों का भी संस्कार होने के कारण भी लकड़ी खत्म हो जाने तो कभी घाट (प्लेटफार्म) खाली न होने के कारण परिजनों को लंबा इंतजार करना पड़ा। ऐसे हालात देख यहां वर्षों से काम करने वाले लोग भी कह उठे कि ईश्वर ऐसे दिन कभी न दिखाए। कोरोना का तांडव अब बस थम जाए।

कोरोना की दूसरी लहर के खौफनाक इरादे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुरादाबाद के दो कोविड अस्पतालों में शनिवार को कुल 17 संक्रमितों की मौत हुई। इनमें से नौ मरीज अकेले मुरादाबाद के हैं जबकि अमरोहा और संभल के तीन-तीन और रामपुर तथा बिजनौर के एक-एक मरीज हैं। एक साथ इतनी अधिक संख्या में मौतों से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के भी हाथ-पांव फूल गए हैं। कोविड नियमों से शनिवार को नौ शवों का अंतिम संस्कार लोकोशेड मोक्षधाम में हुआ। ऐसा नजारा देख हर किसी का दिल दहल रहा था। एक साथ इतने शव आ जाने के कारण लाचार परिजनों को धूप में घंटों इंतजार करना पड़ा।

श्मशान के पंद्रह घाटों पर नहीं जगह
लोकोशेड मोक्षधाम के प्रबंधक संजय ने बताया कि श्मशान में कुल पंद्रह घाट हैं। एक साथ पंद्रह शवों का ही दाह संस्कार किया जा सकता है लेकिन ऐसी स्थिति कभी-कभार ही आती है कि एक साथ सभी घाटों पर शव जल रहे हों लेकिन कोरोना के कहर के बीच कई बार ऐसे हालात बन गए। लोगों को मजबूरन कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

श्मशान में सेनेटाइजर की दरकार
लोकोशेड मोक्षधाम में इतनी बड़ी संख्या में रोजाना कोरोना से होने वाली मौतो के शव दाह के बावजूद सेनेटाइजर की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रबंधक संजय बताते हैं कि कई बार कहे जाने के बाद भी निगम की तरफ से मोक्षधाम में सेनिटाइजेशन की व्यवस्था नहीं कराई गई। अकेले शनिवार को ही श्मशान में कुल 14 चौदह शवों के दाह संस्कार कराए गए। इनमें से नौ शव कोरोना संक्रमितों के जबकि पांच सामान्य मौतों के थे।

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