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मध्य प्रदेश बोर्ड दसवीं का रिजल्ट छमाही, प्री-बोर्ड और आतंरिक मूल्यांकन से तैयार होगा

जबलपुर, यशभारत।  कोरोना संक्रमण के ब.ढते प्रभाव को देखते हुए मध्य प्रदेश बोर्ड दसवीं की परीक्षा अब नहीं ली जाएगी। वहीं बारहवीं की परीक्षा फिलहाल के लिए स्थगित की गई है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल(माशिमं) ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश में लिखा है कि कोरोना के कारण दसवीं बोर्ड की परीक्षा निरस्त की जाती है। वहीं बारहवीं की परीक्षा भी आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई है। साथ ही प्रायोगिक परीक्षाएं भी आगामी आदेश तक स्थगित की गई है। कोरोना संक्रमण सामान्य होने की स्थिति में परीक्षा आयोजन की सूचना 20 दिन पहले दी जाएगी। वहीं दसवीं के परीक्षा परिणाम तैयार करने के संबंध में भी आदेश जारी किए गए हैं। नियमित विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक विद्यार्थियों की छमाही और प्री-बोर्ड व यूनिट टेस्ट एवं आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाएगा।

इन परीक्षाओं में अनुत्तीर्ण रहने वाले विद्यार्थियों को भी 33 अंक देकर पास घोषित किया जाएगा। सभी प्राइवेट विद्यार्थियों को 33 अंक देकर पास घोषित किया जाएगा। अगर कोई असंतुष्ट होता है तो भविष्य में आयोजित परीक्षा में शामिल हो सकेगा। इस संबंध में भविष्य में नीति तय की जाएगी। इस वर्ष दसवीं परीक्षा की प्रावीण्य सूची जारी नहीं की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों को स्कूल के तीन परीक्षाओं के रिजल्ट के आधार पर अंक दिए जाएंगे। फेल होने वाले विद्यार्थियों को 33 फीसद पर पास किया जाएगा। बता दें, कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए अप्रैल से शुरू होने वाली दसवीं व बारहवीं की परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग ने जून तक के लिए स्थगित कर दी थी। इस तरह होगा मूल्यांकन पेपर 100 अंक का होता है। जिसमें 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन व 80 अंक थ्योरी के होते है।

अब विद्यार्थियों को सिर्फ आंतरिक मूल्यांकन के नंबर मिलेंगे। जैसे किसी विद्यार्थी को एक विषय के आंतरिक मूल्यांकन 20 नंबर में से 16 अंक मिलते है। इसमें 80 अंक के अधिभार देते हुए 16 का चार गुना होगा। इससे उक्त विषय में छात्र के 64 अंक होंगे। इसी प्रकार सभी विषयों के अंक देकर रिजल्ट बनाया जाएगा। तीन साल के रिजल्ट पर बनेगा इस साल का परिणाममंडल ने आदेश में साफ कहा है कि स्कूल का रिजल्ट बीते तीन साल के सर्वश्रेष्ठ रिजल्ट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। सर्वश्रेष्ठ से दो फीसद अंक ज्यादा हो सकते है। जैसे किसी स्कूल का बीते तीन साल का रिजल्ट 60, 75 व 70 प्रतिशत है। इसमें 75 फीसदी व दो फीसदी जोड़कर 77 फीसदी से ज्यादा रिजल्ट नहीं होना चाहिए।

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