जबलपुरमध्य प्रदेश

ब्रेकिंग न्यूज़ यश भारत आशीष शुक्ला गुजरात इंजेक्शन प्रकरण में सिटी अस्पताल के संचालक मोखा का नाम सामने!

गुजरात से जबलपुर पहुंचे थे इंजेक्शन, पुलिस जांच की गहराई में जुटी

नामी अस्पताल के नाम आने से सबूतों की खोजबीन, लाखों रुपये के बदले इंजेक्शन का गणित

जबलपुर, यशभारत। यह खबर जब लिखी जा रही है, तब पुलिस इस बात को लेकर तबतिश कर रही हैं कि जो दबीश दी गई,उसमे जो खुलासा हुआ है, वह सही है तो कार्यवाही कैसे की जाय। बात यह है कि गुजरात पुलिस जिसको हिरासत में ले गई है,उसके परिजन ने चौकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि लाखों रुपये के लेनदेन में सपन को गुजरात से इंजेक्शन लाने कहा गया, जीएसटी नंबर के साथ बिल भी भी देने कहा, साथ ही कहा कि इंजेक्शन अस्पताल में लाकर देना,वह डिलेवर भी कर दिए गए।नामी अस्पताल का नाम आते ही पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई।अब सवाल यह था कि उसके बयान में कितनी सत्यता है, इसके प्रमाण जुटाने पुलिस सक्रिय हो गई है।हर कोंन से पुख्ता होने के बाद पुलिस अपनी कार्ययोजना बनायेगी।

अधारताल थाना प्रभारी शैलेश मिश्रा ने बताया कि सपन जैन के चाचा सत्येंद्र जैन ने बताया है कि सिटी अस्पताल से उसके भतीजे को 70 लाख रुपय दवाई के लेना थे मांगने पर मौका ने उससे कहा कि तुम गुजरात से यह इंजेक्शन ले आओ उसके बाद मैं तुम्हें 50 लाख रुपए रिलीज कर दूंगा जिसके लिए उन्होंने बकायदा नकली इंजेक्शन करने वाले डीलर का नंबर भी सपन जैन को दिया था

दो इंजेक्शन भी हुए जप्त
अधारताल पुलिस ने सत्येंद्र जैन के घर से दो इंजेक्शन भी जप्त किए हैं और जांच में जुटी है कि यह इंजेक्शन होने कहां से प्राप्त हुए

 

भगवती फार्मा में की गई जांच
नकली इंजेक्शन की परत दर्पण धीरे धीरे खुलती जा रही है जिसके चलते आज पुलिस ने दवा बाजार स्थित भगवती फार्मा में भी जांच की। वहीं अधारताल स्थित एक दुकान में भी पुलिस ने जांच की।

वर्जन
एएसपी रोहित केसवानी का कहना है कि गुजरात में जो नकली इंजेक्सन पकड़े गए है, उसके तार जबलपुर में भी जुड़े हुए हैं जिसकी जांच जारी हैं।

 

संचालक सिटी अस्पताल सरबजीत सिंह मोखा का कहना है कि जो भी बयान आ रहे हैं वह गलत है हमने आज तक उससे कोई भी रेमदेसीविर इंजेक्शन नहीं लिए हैं वह एक दवा व्यापारी है अस्पताल में रेगुलर दवा की सप्लाई करता है जिसका भुगतान भी निर्धारित समय पर होता रहता है हमें जो भी रेमदेसीविर इंजेक्शन मिलते हैं वह शासन से या जिस कंपनी में हमारा अकाउंट है उससे मिलते हैं।

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