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बुध-गुरु आदित्य योग में होली, प्रदोषकाल में पाताल वासिनी भद्रा

उज्जैन। फाल्गुन पूर्णिमा पर 17 मार्च को होलिका का पूजन होगा। शास्त्रीय मान्यता में होली पूजन के लिए प्रदोष काल सर्वश्रेष्ठ है। इस बार होली बुध-गुरु आदित्य योग की साक्षी में आ रही है। प्रदोष काल में पाताल वासिनी भद्रा भी रहेगी। धर्मशास्त्र के जानकारों का मत है कि इस विशिष्ट योग में परिवार की सुख शांति तथा संतान के दीर्घायु जीवन के लिए होलिका का पूजन करना शुभफल प्रदान करेगा।

ज्योतिषाचार्य ने बताया फाल्गुन पूर्णिमा 17 मार्च को गुरुवार के दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र,शूल योग, वाणिज्य उपरांत बव करण तथा कन्या राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है। खास बात यह है कि होली पर दोपहर 1 बजकर 31 मिनट से रात 1 बज कर 10 मिनट तक पाताल वासिनी भद्रा रहेगी। आमतौर पर भद्रा में शुभ व मांगलिक कार्य निषेध माने गए हैं। लेकिन पाताल वासिनी भद्रा में होलिका का पूजन धन दायक माना गया है। इस दिन प्रदोष काल में शाम 6.40 से रात 8.45 तक पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा।

पंचांगीय गणना के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन कुंभ राशि पर सूर्य,बुध व गुरु का गोचर रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का शनि की राशि पर परिभ्रमण साधना व आराधना के लिए सर्वोत्तम बताया गया है। साथ ही गोचर में बुध व गुरु भी युतिकृत हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

चंद्र राशि अनुसार भद्रा का निवास

– मेष, वृषभ, मिथुन तथा वृश्चिक राशि का चंद्रमा होने पर भद्रा स्वर्ग लोक में वास करती है।

– कन्या, तुला, धनु तथा मकर का चंद्रमा होने पर भद्रा का निवास पाताल में रहता है।

– कुंभ, मीन, कर्क तथा सिंह राशि के चंद्रा में भद्रा भूलोक पर वास करती है।

निवास के अनुसार भद्रा के प्रभाव

– भूलोक वासिनी भद्रा में शुभ व मांगलिक कार्य करना निषेध माना गया है।

स्वर्ग में रहने वाली भद्रा शुभ कार्य करने पर धनधान्य प्रदान करती है।

– पाताल वासिनी भद्रा में शुभ कार्य करने से धन का लाभ होता है।

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