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पूरे इलेक्शन के मालिक न इलेक्शन कमिशन है ना जनता ,उसका मालिक सॉफ्टवेयर और उसके निर्माता हैं: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 

भोपाल यश भारत l पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मेरा आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है बल्कि दबाव में है। चुनाव आयोग से हम निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं। ईवीएम का सारा काम प्राइवेट लोगों के हाथ में है। जब सॉफ्टवेयर ही सब करता है तो वही सॉफ्टवेयर तय करेगा सरकार किसकी बनेगी।

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पूरे इलेक्शन के मालिक न इलेक्शन कमिशन है ना जनता ,उसका मालिक सॉफ्टवेयर और उसके निर्माता हैंl

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहां की ईवीएम को लेकर लालकृष्ण आडवाणी ने भी अविश्वास जताया थाl ईवीएम इस्तेमाल 2003 में शुरू हुआ फिर अविश्वास सामने आने के बाद वीवीपीएटी लगाई गईlवीवीपीएटी सेंट्रल इलेक्शन कमिशन के सर्वर से कनेक्ट होती हैl

 

पहले कलेक्टर कौनसी यूनिट कहां जायेगी ये तय करते थे लेकिन अब रेंडमाइजेशन के नाम पर सेंट्रल सर्वर से होती हैl जिसके लिए प्राइवेट इंजीनियर बुलाए जाते हैंl

 

इंजीनियर लैपटॉप से मशीन को कनेक्ट करते हैं जिसके बाद सिंबल लोड होते हैंl जिसके चलते चिप सर्वे सर्वा हो जाता हैl

 

वीवीपीएटी मशीन में 7 सेकंड के लिए दिखाई देता है लेकिन जो दिखा वही डब्बे में गिरा इस बात का संदेह हैl

 

माइक्रोचिप जो वीवीपीएटी में है वही वोट डाल रहा हैl

 

पूरे विश्व में केवल 5 देशों में ईवीएम से चुनाव होता हैlऑस्ट्रेलिया में मशीन में जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है वो पब्लिक डोमेन में हैl लेकिन भारत में आज तक कौनसा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है ये जानकारी पब्लिक नहीं हैl इलेक्शन कमीशन कहता है पब्लिक करने से सॉफ्टवेयर हैक हो सकता हैl

आरटीआई के अंतर्गत कई प्रश्न पूछे गए जिसके eci और beil अलग अलग जवाब दे रहे हैंlपार्ट्स अलग अलग वेंडर्स से आते हैंl कहा गया की चिप वन टाइम प्रोग्राम चिप हैl लेकिन जब वीवीपीएटी आई तो चिप मल्टीपल प्रोग्रामेबल हो गईl रिटर्निंग ऑफिसर्स कहते हैं की वीवीपीएटी प्रोग्राम करने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी मांगी जाती है

Eci इन सभी सवालों का जवाब नहीं देतीl

 

– यह लगाया आरोप

 

मशीन कौन बना रहा है ये भी नहीं पताl

 

सॉफ्टवेयर भी विदेशी हैlकेवल सॉफ्टवेयर ही मतदान प्रभावित कर सकता हैl

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