मध्य प्रदेशराज्य

पुलिस की जांच प्वाइंट से निकल रहे ओवर लोडेड आटो : राहगीरों ने लगाएं प्रताड़ित करने के आराेप 

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यशभारत डिंडौरी|डिंडोरी जिले में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय और प्रशासनिक आदेश के बाद चैकिंग अभियान तेज किए गए हैं जिससे यातायात नियमों के मद्देनजर सुधार किया जा सके। इस लक्ष्य को रखकर प्रशासनिक तौर पर जिला मुख्यालय में गाड़ियों की जांच के लिए प्रतिदिन वाहन चैकिंग जेल बिल्डिंग के पास लगाई जाती है जहां लोगों को नियमों का पालन न करने पर चेतावनी और समझाइश दी जाती है वहीं दूसरी ओर बेसक जनता जांच के नाम पर क्षेत्र के रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले कागजात और नियमावली के चक्कर में दोनों ओर कतार लगाकर खड़े रहते हैं और जांच बंद होने पर निकलने का इंतजार करते हैं। जबकि पुलिस चैकिंग प्वाइंट के दौरान अनेक आटो रिक्शा परमीशन से ज्यादा सवारियां बैठाकर यातायात पुलिस के सामने से फर्राटे भर रहे हैं। 

ताजा मामला डिंडोरी मुख्यालय में जेल बिल्डिंग के करीब लगने वाले चैक प्वाइंट का है जहां सामान्य तौर पर मोटरसाइकिल चालकों को रोककर प्रताड़ित करने के आरोप लगे हैं जिसमें राधेश्याम नाम के एक स्कूटी चालक ने बताया कि मेरे पास हेलमेट नहीं है तो रोक लिए है पर बहुत से आटो ओवर लोडेड निकल गये उन्हें नहीं रोका गया“| वहीं मेरे अलावा बहुत सारे मोटरसाइकिल चालक निकले पर नहीं रोका गया, राधेश्याम ने 300 रूपए मांगने का आरोप लगाया है। इसी तरह अनेक राहगीरों ने अपनी समस्या बताई ,जिसमें उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कार्यवाही सभी पर बराबर होना चाहिए, किसी को देखकर छोड़ना तथा कुछ लोगों को नियमों के चलते आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाना ज्यादती है, निश्चित तौर पर डिंडोरी जिले में बहुत सारे एक्सीडेंट रोज हो‌ रहे है जिसमें जांच के बाद पता चलता है कि बहुतों के पास हेलमेट नहीं है, बहुतों के पास इंश्योरेंस नहीं है, बहुतों के पास पर्यावरण का कागज नहीं है, जिसकी जांच होनी चाहिए और कार्यवाही भी हो पर कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति और मुख्यालय में चल रहे सैकड़ों आटो रिक्शा जो नियमों को पालन नहीं करते, दर्जनों आटो चालकों के पास लाइसेंस नहीं रहता, परमिट और इंश्योरेंस भी नहीं रहता पीयूसी के तो क्या ही कहने पर उन्हीं आम लोगों के सामने फर्राटे भर रहे आटो और चालकों की मनमानी पर कार्यवाही ना होने पर प्रश्नचिन्ह खड़े करना लाजमी है। 

इस पूरे मामले को लेकर यातायात पुलिस से उनका पक्ष जानने दूरभाष पर संपर्क किया गया ,लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करना जरूरी नहीं समझा।

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