भोपालमध्य प्रदेश

पीएस ने लिखी चिट्ठी, रिपोर्ट न मिलने से सार्वजनिक नहीं हो पा रही खाली बेड्स की संख्या

भोपाल
कोरोना संक्रमण के बीच जिलों में दिन रात सेवाएं दे रहे सरकारी अमले के बीच समन्वय की कमी का मसला सामने आया है। इस मामले में सरकार के एक विभाग प्रमुख ने कलेक्टरों को चिट्ठी लिख दी है और कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अमले से समन्वय कराएं वहीं दूसरी ओर प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी भी अब ग्रामीण क्षेत्र में दिक्कत बन रही है। कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक उन्हें कोरेंटाइन सेंटर में रहना होगा, जबकि पूरी तरह ऐसा हो नहीं पा रहा। ऐसे में पंचायत सचिवों व रोजगार सहायकों पर कार्यवाही की गाज गिर सकती है।

कोरोना संक्रमण के अत्यधिक घातक होने के साथ मरीजों के लिए अस्पताल में उपलब्ध बेड्स की संख्या को लेकर विभागों में आपस में समन्वय की कमी सामने आई है। इसके चलते शासन को मिलने वाली जानकारी में भी विलंब हो रहा है जिसे देखते हुए प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय विभाग ने सभी कलेक्टरों को चिट्ठी लिखी है कि कुछ जिलों में स्वास्थ्य विभाग के अफसर रिक्त बेड्स की जानकारी नहीं देते, उन्हें जानकारी देने के लिए कहें ताकि सटीक जानकारी सार्वजनिक की जा सके।

विवाद का यह मसला जिलों में स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग के अफसरों कर्मचारियों के बीच सामने आया है। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय ने पत्र में लिखा है कि कोविड 19 से उत्पन्न स्थिति को बेहतर संभालने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेड एवलेबिलिटी और रेट्स की जानकारी सार्थक. एनएचएमएमपी. जीओवी.इन पोर्टल पर दर्ज करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। इसकी एंट्री रोज हो और मानीटरिंग कम समय में हो सके, इसके लिए सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को जिलों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि इस विभाग के अफसर रोज सुबह 8 से 11 और शाम को 6 से 9 बजे दौरा कर वर्तमान स्थिति का डेटा सार्थक पोर्टल पर दर्ज कराएंगे। यह जानकारी विभाग द्वारा गूगल शीट पर भी दर्ज कराई जाने के निर्देश हैं।

सरकारी और निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की भरमार के चलते बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश भर में हजारों मरीजों को निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती करने से इनकार किया जा रहा है। सरकार लगातार बेड्स की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है और जिन मरीजों को अस्पताल में एडमिट होना जरूरी है, उनके लिए ही सार्थक एप के माध्यम से जानकारी दिए जाने का काम कराया जा रहा है। हालांकि यह बात भी सामने आ चुकी है कि एप में खाली बेड बताए जाते हैं लेकिन मौके पर वहां कोई बिस्तर नहीं मिलता है।

प्रमुख सचिव प्रतीक हजेला ने कलेक्टरों से कहा है कि वे प्रतिदिन वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा इसकी समीक्षा करते हैं कि जिलों से विभाग के अफसरों ने क्या जानकारी दी है? कई जिलों से यह शिकायत हुई है कि उन्हें कोरोना कर्फ्यू के दौरान आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और जब वे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के पास जाते हैं तो उन्हें जानकारी देने में आनाकानी की जाती है। पीएस सामाजिक न्याय ने कलेक्टरों से कहा है कि जिलों में इस काम में लगाए गए अफसरों को प्राधिकृत पत्र जारी करें ताकि आने जाने में दिक्कत न हो और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देशित करें कि बेड्स और रेट्स की जानकारी अपडेट देने में देरी न करें। 

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