नकली वकील के वेश में चला रहा था घुसपैठियों का दस्तावेज रैकेट, एटीएस की कार्रवाई में बड़ा खुलासा, 12वीं पास युवक बना ‘अधिवक्ता’, कलेक्ट्रेट में घूमकर बनवाता था फर्जी पासपोर्ट; अफगानियों के भारतीय बनने की थी साजिश
12वीं पास युवक बना ‘अधिवक्ता’, कलेक्ट्रेट में घूमकर बनवाता था फर्जी पासपोर्ट; अफगानियों के भारतीय बनने की थी साजिश

जबलपुर। राज्य आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को वैध बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है जो खुद को वकील बताकर कलेक्ट्रेट में खुलेआम फर्जीवाड़ा कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि आरोपी मात्र 12वीं पास है, लेकिन काला कोर्ट पहनकर खुद को अधिवक्ता बताता था और पासपोर्ट से लेकर आधार कार्ड तक के फर्जी दस्तावेज बनवाने का गोरखधंधा कर रहा था।
घोटाले का चौथा किरदार चढ़ा हत्थे
गिरफ्त में आए चंदन सिंह ठाकुर पिता अमर सिंह, निवासी शंकर शाह नगर, रामपुर छापर ने खुद को वकील बताते हुए न सिर्फ लोगों को गुमराह किया, बल्कि अफगानी नागरिकों के लिए जाली दस्तावेज तैयार कर उन्हें भारतीय पासपोर्ट तक दिलवाया। उसके भाई सूरज सिंह का नाम भी सामने आया है, जो कि कमिश्नर कार्यालय में बाबू के पद पर कार्यरत है। उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पहले पकड़े गए थे वनरक्षक और अफगानी एजेंट
इस मामले में पूर्व में एटीएस ने तीन अन्य आरोपियों –
1. सोहबत खान निवासी छोटी ओमती,
2. दिनेश गर्ग (वन विभाग में पदस्थ, चुनाव सेल कलेक्टर कार्यालय में ड्यूटी पर),
3. महेंद्र कुमार, निवासी कटंगा – को गिरफ्तार किया था।
इन तीनों को कोर्ट में पेश कर 6 अगस्त तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है।
बंद कमरे में पूछताछ, सामने आए कई नए नाम
सभी चारों आरोपियों से एटीएस टीम द्वारा अलग-अलग कमरों में गहन पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जो इस गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। अफगानी घुसपैठियों को भारतीय नागरिक बनाने का यह जाल पूरे राज्य में फैला हो सकता है।
एके-47 के साथ सोशल मीडिया पर फोटो, आतंकवाद से संबंधों की भी जांच
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह से जुड़े एक व्यक्ति ने विदेश से एके-47 के साथ फोटो पोस्ट की थी। भले ही उसे बाद में डिलीट कर दिया गया हो, लेकिन एटीएस अब आतंकी एंगल से भी जांच कर रही है।
पश्चिम बंगाल से जबलपुर शिफ्ट कर फर्जी दस्तावेज बनवाए गए
अफगानी नागरिक अकबर और इकबाल के नाम सामने आए हैं, जिनके लिए पहले पश्चिम बंगाल में रहकर जबलपुर के पते पर आधार और पासपोर्ट तैयार करवाया गया। ऑनलाइन पता बदलकर फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाए गए।
गहराती जांच में कई विभागीय चेहरे भी होंगे उजागर
जांच में ऐसे सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ रही है जो पुलिस वेरिफिकेशन, पोस्ट ऑफिस दस्तावेज सत्यापन और कागज़ात तैयार कराने में शामिल हो सकते हैं। अब तक 10 लाख रुपये से अधिक के अवैध लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
एटीएस का सख्त रुख, रैकेट की जड़ तक पहुंचेगी जांच
इस गिरोह के तार न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और अफगान मूल के गिरोहों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। एटीएस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए जल्द ही और गिरफ्तारियां कर सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि दस्तावेजों की लापरवाही किस तरह देश की सुरक्षा पर सीधा खतरा बन सकती है।







