नरसिंहपुर,तेंदूखेड़ा l प्राथमिक शाला विजोरा में ध्वजारोहण के उपरांत शाम को ध्वज ना उतारने दो दिन बाद 17 अगस्त को एक महिला के माध्यम से ध्वज उतरवाये जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।यह विषय सोशल मीडिया के साथ प्रिंट मीडिया ने प्रमुखता से लिया जिसे लेकर 18 अगस्त को विकास खंड शिक्षा अधिकारी संकुल प्राचार्य के साथ मौके पर पहुंचे और स्कूल पहुंचे गांव वालों के बीच वस्तु स्थिति का जायजा लिया। स्वयं दोषी प्रधान पाठक नरेश कुमार मेहरा ने कुछ कारण को बताते अपनी गलती को भी स्वीकार कर लिया है लेकिन मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने स्कूल की अव्यवस्थाओं की अधिकारियों के सामने चुप्पी टूटी और व्याप्त विसंगतियों को उजागर कर दिया।
पंचनामा , होगी कार्रवाई
मौके पर पहुंचे विकास खंड शिक्षा अधिकारी पंचम सिंह मरावी ने स्पष्ट किया कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विषय जब सामने आया वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा मिले दिशा निर्देश के उपरांत बिलहरा संकुल प्राचार्य को साथ लेकर यहां पर आये है। निश्चित तौर पर यह विषय काफी गंभीर है और ग्रामीण तथा बच्चों के पालकों द्वारा जो भी बताया जा रहा है।शिक्षक की गतिविधियों से लगभग हर वर्ग परेशान हैं। पंचनामा बनाकर उपस्थित पक्षों के कथन लेकर वस्तु स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा जो भी तथ्य निकलकर सामने आयेंगे उस आधार पर उचित कार्यवाही की जायेगी।
11 बच्चों में उपस्थित मिले 5 बच्चे
पहली दूसरी और चौथी में बच्चे ही नहीं
जांच के दौरान एक और विषय सामने निकल कर आया है कि यहां पर कुल 11 बच्चे ही दर्ज हैं। लेकिन मौके पर मात्र पांच बच्चे ही स्कूल में उपस्थित मिले। सोचनीय विषय तो यह सामने आया कि यहां पर कक्षा पहली दूसरी और चौथी कक्षा में एक भी छात्र नहीं है। कक्षा तीसरी में पांच और कक्षा पांचवीं में छ बच्चे दर्ज हैं। विसंगति के बीच विसंगति पूर्ण स्तिथि यह और सामने आई कि यहां पर सभी छात्र एक साथ साथ बैठते हैं।दो शिक्षक पदस्थ हैं।केवल एक ही शिक्षक नियमित रूप से आते हैं।वही पढ़ाते हैं।वाकी आंगनवाड़ी भी इसी प्राथमिक शाला में लगा करती है।
चटनी की तरह मिलती है सब्जी
जांच पड़ताल के दौरान मध्यान्ह भोजन का भी विषय सामने निकल कर आया यहां पर उपस्थित बच्चों को केवल सब्जी रोटी ही आती है मीनू के हिसाब से भोजन नहीं आता बल्कि सब्जी छोटे से डिब्बे में आई थी जो चटनी की तरह बट जाती है।
पढ़ते है मजदूरों के बच्चे
एक और विषय सामने यह निकलकर सामने आया है कि यहां पर केवल गरीब मजदूरों के ही बच्चे पढ़ते हैं।पहले 28 बच्चे अध्ययन किया करते थे लेकिन विसंगति पूर्ण स्तिथि के चलते लोगों ने अपने अपने बच्चों को यहां से निकाल लिया है। सोचनीय विषय तो यह बना हुआ है कि एक तरफ शासन अधिक से अधिक बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए आये दिन नित नई योजनाओं के माध्यम से शाला भेजने प्रेरित कर रही है और यहां बच्चों को स्कूलों से बाहर निकाल रहें हैं।
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