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देश में पहली बार मिला यलो फंगस का मरीज, जानिए क्या है लक्षण, कारण और बचाव

 नई दिल्ली। काली और सफेद फफूंद की बीमारी के बीच अब पहली बार देश में पीली फफूंद (यलो फंगस) का मरीज भी मिलने से हड़कंप मच गया है। देश में पहली बार गाजियाबाद जिले में यलो फंगस का मामला सामने आया है। इस कारण से डॉक्टरों की चिंता अब ज्यादा बढ़ गई है। गाजियाबाद में यलो फंगस का पहला मामला सामने आने के बाद स्थानीय सर्जन डॉ. बीपी सिंह ने कहा कि जो मरीज उनके पास आया, वह संजय नगर इलाके में रहने वाला है और उसकी नंजल एंडोस्कोपी के बाद यलो फंगस के बारे में जानकारी मिली है। डॉक्टर बीपी सिंह ने यलो फंगस के बारे में बताया कि यह छिपकली जैसे रेपटाइल्स में होता था और यह जिस रेपटाइल जीव में होता है, वह जीवित नहीं बचता है, लेकिन पहली बार ऐसा मामला किसी इंसान में देखने को मिला है।

जानलेवा होता है यलो फंगस

मेडिकल साइंस के मुताबिक यह म्युकस सेप्टिकस होता है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में घाव होता है और उस घाव को भरने में समय लगता है तो यह सेप्टीसीमिया पैदा कर सकता है, इस कारण के ऑर्गन डैमेज होने का खतरा भी रहता है।

यलो फंगस के लक्षण

नाक का बंद होना और अंगों का सुन्न होना। इसके अलावा बदन दर्द और शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने इसके प्रमुख लक्षण हैं। साथ ही कई मरीजों में हार्ट रेट का बढ़ जाना और घावों से मवाद बहना और शरीर कुपोषित जैसे दिखने लगता है।

यलो फंगस का कारण

यलो फंगस होने का मुख्य कारण गंदगी है और जिस सरीसृप जीव की इम्युनिटी कमजोर होती है उसे यलो फंगस की बीमारी जल्दी होती है। कोरोना में अब इंसानों की इम्युनिटी कम हो रही है तो इस कारण से भी यलो फंगस इंसानों को अपना शिकार बना रहा हो।

यलो फंगस से ऐसे करें खुद का बचाव

अपने आसपास ज्यादा सफाई रखें, कोरोना से ठीक होने के बाद हाइजीन का ज्यादा ध्यान रखें क्योंकि इम्युनिटी बहुत कमजोर होती है। हमेशा ताजा खाना ही खाएं। घर की नमी नापने के लिए यंत्र भी जरूर रखें और ध्यान रहें कि अपने घर के आसपास 30 से 40 फीसदी से ज्यादा नमी खतरनाक हो सकती है। ऐसे स्थान पर ही यलो फंगस ज्यादा तेजी से फैलता है। हमेशा स्वस्थ और ताजा खाना खाएं और पानी ज्यादा पीएं।

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