सतना /चित्रकूट यश भारत।धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र चित्रकूट की पवित्र नदियां अब गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रही हैं। National Green Tribunal (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने मंदाकिनी, पयसुनी और सरयू नदियों में बढ़ते प्रदूषण, अवैध अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
आस्था बनाम प्रदूषण: दोहरी चुनौती
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चित्रकूट केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि भगवान रामा ने अपने वनवास का लंबा समय यहीं बिताया था।
इसके बावजूद नदियों की मौजूदा स्थिति चिंताजनक है—जहां कभी श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते थे, वहां अब प्रदूषण का गहरा असर दिखाई दे रहा है।
बिना ट्रीटमेंट के सीवेज बना सबसे बड़ा खतरा
ट्रिब्यूनल के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नगर पंचायत का अधिकांश सीवेज बिना किसी शोधन के सीधे नालों के जरिए नदियों में छोड़ा जा रहा है।
इससे पानी का रंग काला और भूरा हो चुका है, जो गंभीर प्रदूषण की ओर इशारा करता है। यह न केवल पर्यावरण, बल्कि स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है।
एनजीटी ने पाया कि नदी तटों पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए गए हैं। इनमें होटल, धर्मशालाएं, आश्रम और निजी कॉलोनियां शामिल हैं।
कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को मोड़कर व्यावसायिक उपयोग करने के मामले भी सामने आए हैं, जिससे जलधारा बाधित हो रही है और पारिस्थितिकी तंत्र को स्थायी नुकसान पहुंच रहा है।
प्रशासन की निष्क्रियता
ट्रिब्यूनल ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्षों बीतने के बावजूद पर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) न तो स्थापित किए गए और न ही प्रभावी ढंग से संचालित हो रहे हैं।
नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
NGT के सख्त निर्देश
एनजीटी ने कलेक्टर, सतना को निर्देशित किया है कि—
* नदी क्षेत्र का सीमांकन कर अतिक्रमणों की पहचान की जाए
* सभी अवैध निर्माणों को हटाया जाए
* भविष्य में नए अतिक्रमण पर पूर्ण रोक लगाई जाए
वहीं, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं
* प्रदूषण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए
* नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हो
* पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाए
तीन हफ्ते में देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
प्रशासन से मांगी गई रिपोर्ट में शामिल होंगे—
* चित्रकूट की स्थायी जनसंख्या और त्योहारों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
* जल उपयोग और उत्पन्न सीवेज का आंकड़ा
* मौजूदा STP की क्षमता और कमी (gap analysis)
* ठोस कचरा प्रबंधन की स्थिति और वैकल्पिक उपाय
अनुच्छेद 21 का हवाला
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्वच्छ जल और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार, Article 21 of the Indian Constitution के तहत प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
किसी भी व्यक्ति या संस्था को व्यावसायिक लाभ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अगली सुनवाई 15 मई को
मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को निर्धारित की गई है। सभी संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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