छत्तीसगढ़राज्य

गरियाबंद का डिस्ट्रिक्ट अस्पताल ही कर्मचारियों और मरीजों के लिए बना कोरोना संक्रमण फैलाने का स्पॉट

गरियाबंद
गरियाबंद जिले के जिला अस्पताल के अधिकारी व कर्मचारी दिन और रात कोरोना मरीजों के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके साथ लापरवाही यह हो रही है कि ओपीडी बेसिस पर यां कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए कोई ट्रीटेंट प्रॉटोकॉल नहीं है और न ही कोई अधिकारी व कर्मचारियों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। इसी के चलते पिछले 10 दिनों में राजिम में 7, फिंगेश्वर में 12, छूरा में 6, गरियाबंद में 7 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव से संक्रमित हो चुके हैं। कड़े शब्दों में कहा जा सकता हैं कि डिस्ट्रिक्ट अस्पताल ही कर्मचारियों और मरीजों के लिए कोरोना संक्रमण फैलाने का स्पॉट बन गया है।

अस्पताल के सारे कर्मचारियों ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सीएमएचओ और कलेक्टर को भेजा है जिसमें उन्होंने कहा हैं कि डब्ल्यूएचओ द्वारा नोवेल कोरोना वायरस की बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तथा राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया है। जिसमें जिला अस्पताल के अधिकारी एवं कर्मचारी अपना आपातकालीन 2437 अपनी सेवा दे रहे हैं, उनके साथ लापरवाही का आलम यह है कि आईपीडी बेसिस पर यहां कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए कोई ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल नहीं है और न ही कोई अधिकारी और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल है, न इंतजाम है। इस लापरवाही की वजह से जिला अस्पताल के कर्मचारी एक-एक कर कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। यह भी कहा है कि डिस्ट्रिक्ट अस्पताल ही कर्मचारियों और मरीजों के लिए कोरोना संक्रमण फैलाने का स्पॉट बन गया है।

यह बताया गया कि वर्तमान में अप्रैल 2021 में विगत 10 दिनों की स्थिति ऐसी है कि राजिम में 7, फिंगेश्वर में 12, छूरा में 6, गरियाबंद में 7 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव से संक्रमित हो चुके हैं। जबकि 10 महीने से संचालित गरियाबंद के डेडिकेटेड कोविद अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी उतनी संख्या में पॉजिटिव नहीं आए हैं जितनी संख्या में जिला अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी 10 दिन में आ चुके हैं। अगर जिला अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज किया जाना है तो डेडिकेटेड कोविद अस्पताल में पेशेंट के ट्रीटमेंट के लिए एवं कर्मचारियों के सुरक्षा के लिए जो प्रोटोकॉल है, और सुरक्षा के इंतजाम किए गए है वहीं प्रोटोकॉल एवं सुरक्षा जिला अस्पताल में भी फॉलो कराया जाए और नार्मल पेशेंट को यहां न रखा जाए जिससे उनको कोरोना के संक्रमण से बचाया जा सके।

रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए पूर्व में इसके लिए 8 अप्रैल को आर्डर निकला गया था कि रैपिड एंटीजन टेस्ट की 2437 जांच हेतु व्यवस्था किया जाए और जल्द रिपोर्ट दिया जाए। जिससे ओपीडी और आपातकालीन में आए मरीजों का बाहर में ही कोरोना पॉजिटिव और कोरोना निगेटिव का तत्काल स्क्रीनिंग किया जा सके और उसके हिसाब से मरीजों को बेहतर इलाज प्रदाय किया जा सके और बाकी मरीजों एवं हॉस्पिटल में कार्यरत कर्मचारियों को संक्रमित होने से बचाया जा सके। यह भी बताया गया कि वर्तमान में शाम 5 बजे के बाद आपातकालीन में आए मरीजों का एंटीजन टेस्ट स्टॉफ नर्सों द्वारा किया जा रहा है वह भी बिना सुरक्षा उपकरण पहने और अभी के वर्तमान स्थिति ये है कि 10 में से करीब 7 से 8 मरीज कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। जिससे आपातकालीन कक्ष में जो ड्यूटी में अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे है उनको 90 प्रतिशत इन्फेक्शन का खतरा है।

उन्होंने बताया कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में आइसोलेट कर के रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीजों को पीडिया वार्ड में, पोस्ट आॅफ ओटी वार्ड में, मेल वार्ड में, फीमेल वार्ड में कहीं भी अन्य मरीजों के साथ रखा गया है जिससे यहां अन्य बीमारी से भर्ती मरीजों को एवं अधिकारियों  और कर्मचारियों को कोरोना संक्रमित होने का खतरा सौ प्रतिशत बढ़ गया है। वर्तमान में जिला अस्पताल ही कोरोना संक्रमण फैलाने का स्पॉट बन गया है।

नगर सेना विभाग के कर्मचारी और होम गार्ड जो यहां ड्यूटी कर रहे वह सुबह ड्यूटी के समय अंदर बैठ कर मोबाइल खेलते रहते हैं और रात्रि कालीन ड्यूटी में अपना काम ना करके सोये रहते हैं, और ये सुरक्षा कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पेशेंट और उनके अटेंडर को हॉस्पिटल में घूमने से रोकते है और न ही नार्मल पब्लिक का दैनिक जीवन के सामान एवं उपकरण को इस्तेमाल करने से रोकते है, इनको सख्त से सख्त कड़ाई एवं नियम पूर्वक यहां जिला अस्पताल में उनका क्या-क्या काम है उनको समझाया जाए एवं कड़ाई से पालन कराया जाए कहा जाए अन्यथा इनको हटा कर पुलिस वालों को हॉस्पिटल के ड्यूटी रखा जाए। जिससे बाकी स्टॉफ और मरीजों को संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है उसे कम किया जा सके।

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