जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

खरीदी केंद्रों में वारदाना खत्म : किसानों की आंखें हुई नम, मेहनत से ऊगाई फसल को नष्ट होते देख रहे

ताऊ ते चक्रवात के कारण खरीदी केंद्रों में भरा पानी, केंद्रों में वारदाना नहीं, 3 जून तक होना है गेहूं खरीदी

जबलपुर। मेहनत कर फसल उगाकर बरसात में घर बैठकर आराम से दो रोटी की खाने की कवायद करने वाला किसान आज मुसीबत में है। उसकी आंखों में आंसू है। कारण है बेवजह हुई बारिश, खरीदी केंद्रों में हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया है, केंद्रों में वारदाना नहीं है अब किसान इस बात को लेकर परेशान है कि उसकी गेहूं तो भीग खराब हो गई उसकी भरपाई कौन करेगा।

ताऊ ते चक्रवात के कारण हुई बेमौसम और भारी बारिश के साथ चले तूफान ने गेहूं उपार्जन केंद्रों में संकट मंडरा गया है। अपनी उपज लेकर केंद्रों तक पहुंचे किसानों को अनायास ही भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


बीती शाम से हुई चक्रवाती वर्षा ने किसानों की आंखों को नम कर दिया। पूरी तरह ढांक कर रखी गई उपज के तिरपाल तेज हवाओं में उड़कर दूर तक चले गए। देखते ही देखते पूरा गेहूं किसानों के सामने तरबतर हो गया.. रुक रुक कर रात भर हुई बरसात से उपार्जन केंद्रों में एक से 2 फीट तक पानी भर गया.. खेतों में बनाए गए केंद्रों के कारण किसानों की उपज काफी हद तक खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी है.. फिर भी किसान अपनी उपज को हर हाल में किसी तरह बचाने के कयासों में जुटे हुए हैं।

बारदाना की कमी बना मुख्य कारण
किसानों ने बताया कि छतरपुर समिति उपार्जन केंद्र में 3 दिनों से बारदाना उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते उनकी तौल नहीं हो पाई.. पूरी उपज केंद्रों में रखी रह गई और बारिश ने उनकी उपज को तरबतर कर दिया.. किसानों ने बताया कि अब उनके सामने उपज को सुखाने और सही करने का संकट आ गया है।


मैसेज भी समाप्ति की कगार पर
केंद्रों में गेहूं खरीदी का अंतिम समय चल रहा है, 3 जून तक खरीदी निर्धारित की गई है, ऐसे में किसान कब तक अपनी उपज को साफ सुथरा कर पाएगा..? किसान के मैसेज भी तय दिनांक बीत जाने के कारण समाप्त होने के कगार पर हैं। ऐसे में किसान, शासन-प्रशासन से अपनी उपज की तौल कराने की गुहार लगा रहे हैं।

बरेला से लेकर पाटन तक में किसान परेशान
बताया जा रहा है कि बेमौसम बारिश से बरेला से लेकर पाटन तक का किसान परेशान है। खरीदी केंद्रों में वारदाना नहीं होने की शिकायत किसान कई बार संबंधित अधिकारियों से कर चुकें है परंतु उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। हजारों क्विंटल गेहूं भीगकर खराब हो गया है।

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