जबलपुरमध्य प्रदेश

आदित्य अस्पताल में हंगामा: 1 लाख 63 हजार नहीं मिले तो शव को बंधक बनाया

मुख्यमंत्री राहत सहायता कोष का लेटर मानने को तैयार नहीं अस्पताल प्रबंधन

यशभारत संवाददाता जबलपुर। आदित्य अस्पताल में आज सुबह-सुबह एक मरीज के शव को बंधक बनाए जाने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन लूट-खसूट कर रहा है। मरीज पूरी तरह से ठीक हो गया था लेकिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना था कि अस्पताल प्रबंधन को वह मृतक के इलाज के 2 लाख रूपए दे चुकें है परंतु अस्पताल प्रबंधन 1 लाख 63 हजार रूपए और मांग रहा है। पैसे नहीं देने पर मरीज के शव को बंधक बना लिया है। इधर इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों से दूरभाष में बात करनी चाही किंतु किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया।

गंगा गढ़ा निवासी ममता तिवारी ने बताया कि बीते दिनों अपनी बहन सुषमा मिश्रा का एक्सीडेंट होने पर कटनी से जबलपुर आदित्या अस्पताल में रिफर किया गया था। यहां पर एक्सीडेंट के इलाज के साथ कोरोना का इलाज भी शुरू कर दिया गया। कोरोना टेस्ट लिया गया जिसकी रिपोर्ट निगोटिव आई, 10 दिन बाद फिर टेस्ट लिया गया तो पॉजीटिव आया इसके बाद दीदी की मौत हो गई।

सीएम राहत कोष का लेटर नहीं मान रहा अस्पताल
परिजनों ने बताया कि शव को बंधक बनाए जाने की जानकारी पाटन विधायक को दी गई जिन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष का लेटर देते हुए अस्पताल प्रबंधन के पास जमा करने को कहा था। लेटर लेकर अस्पताल प्रबंधन के पास पहुंचे तो उन्होंने लेटर लेने से साफ इंकार कर दिया।

स्लीमनावाद में हुआ था एक्सीडेंट
मृतिका की बहन ममता तिवारी ने बताया कि सुषमा मिश्रा करके स्लीमनावाद से कटनी जा रही थी वहां एक्सीडेंट हो गया था कटनी अस्पताल लेकर गए वहां से आदित्य अस्पताल में रिफर कर दिया। यहां पर भर्ती मरीज के इलाज में लापरवाही की गई जिसकी वजह से उसकी मौत हुई।

सिटी स्केन के 5 हजार लिए
मृतिका के परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन इलाज के नाम पर लूट रहा है। शासन से सिटी स्केन के 3 हजार रूपए तय फिर भी अस्पताल प्रबंधन ने 5 हजार रूपए दिए। आॅपरेशन के लिए 85 हजार रूपए किए गए। परिजनों का कहना था कि मरीज ठीक हो गया था जिसका सिर का आॅपरेशन किया गया था, सभी से मरीज बात करने लगी थी परंतु अचानक से कोरोना की रिपोर्ट पॉजीटिव आई और उसकी मौत हो गई।

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