सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति मामले में पिछली 13 अगस्त को दिए गए फैसले पर कायम रहते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और असिस्टेंट प्रोफेसर की ओर से दायर रिव्यू याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले से 2013 में विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए असिस्टेंट प्रोफेसर को हाईकोर्ट से झटका लगा है।
जबलपुर हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को डॉ दीपक गुप्ता की याचिका पर निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय को निर्देश दिए गए थे कि 2013 में विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए असिस्टेंट प्रोफेसर के मामले में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के 7 फरवरी 2020 के निर्णय के तहत 3 माह के भीतर नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया करें। कोर्ट ने साफ यह भी कहा था कि यदि उक्त अवधि में ऐसा नहीं हुआ तो 14 नवंबर 2022 के निर्णय के तहत नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर 15 नवंबर 2025 से कार्यरत नहीं माने जाएंगे। इस मामले में हाईकोर्ट ने विवि पर 5 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोक दिया था।
विश्वविद्यालय में 2013 में हुई इन नियुक्तियों में नियमों को दरकिनार कर कुल 82 पदों के विरुद्ध 157 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियां कर दी गई थीं। इन नियुक्तियों में जिन विभागों में पद विज्ञापित भी नहीं थे उनमें भी रोलिंग एडवरटाइजमेंट के नाम पर पद भर दिए गए गए थे। इसके अलावा कई विभागों में स्वीकृत से ज्यादा पद भरे गए थे। इन नियुक्तियों में खास बात यह थी कि इंटरव्यू के दौरान सागर के कई योग्य आवेदकों को क्षेत्रीय दुर्भावना के तहत दरकिनार कर चयन से वंचित कर दिया गया था।
सीबीआई ने तत्कालीन कुलपति डॉ एनएस गजभिए को खिलाई थी 100 दिन तक खिलाई थी जेल की हवा
तत्कालीन कुलपति डॉ एनएस गजभिए के कार्यकाल में हुए इस नियुक्त घोटाले के खिलाफ विवि में पूर्व में चयनित होकर कार्यरत रहे संविदा शिक्षकों डॉ अनिल पुरोहित, डॉ दीपक गुप्ता, डॉ संदीप सबलोक, डॉ वेद प्रकाश दुबे, आरटीआई व्हिसल ब्लोअर अरविंद भट्ट समेत एक सैकड़ा से ज्यादा संविदा शिक्षकों ने विभिन्न स्तरों पर मुहिम चलाते हुए कुलपति तथा नियुक्ति प्रक्रिया में लिप्त रहे लोगों के खिलाफ सीबीआई ने मामले दर्ज कराए थे। सीबीआई ने मामले की जांच में तत्कालीन कुलपति डॉ एनएस गजभिए को प्रथम दृश्टया दोषी पाते हुए उन्हें गिरफ़्तार कर करीब 100 दिन तक जेल की हवा भी खिलाई थी।
हाइकोर्ट द्वारा रिव्यू पिटीशन को ख़ारिज किए जाने के उक्त फैसले के बाद 13 अगस्त को दिया गया आदेश बरकरार रहेगा जिसके तहत 15 नवंबर तक विवि को नए सिरे से नियुक्ति करना ही होगी। हालांकि विवि प्रशासन व असिस्टेंट प्रोफेसर के पास हाईकोर्ट की डबल बैंच में याचिका का विकल्प है। लेकिन डॉ दीपक गुप्ता द्वारा इस मामले में दायर केविएट के चलते उन्हें सीधे तौर पर कोई राहत मिलने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं। ऐसे में विवि के पास उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने का एकमात्र विकल्प ही शेष बचेगा। जिसे लेकर याचिकाकर्ता डॉ. दीपक गुप्ता व अन्य सहयोगी संविदा शिक्षक पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दे रहे हैं।
Back to top button