अब पानी सप्लाई के लिए होगा प्लास्टिक की पाइप लाइनों का उपयोग, अभी तक डाली जाती थी आयरन की पाइप लाइन
कटनी में कई दशकों से नहीं बदली पाइप लाइन, 15 साल में बदलने का है नियम

कटनी, यशभारत। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी पीने से 20 मौतों के बाद अब नगरीय प्रशासन विभाग वर्षों पुरानी पाइप लाइनों का सर्वे करा रहा है। कटनी नगर निगम को भी इसकी रिपोर्ट दो हफ्ते में देना है। जहां की पाइप लाइन पुरानी हो गई हैं, वहां नई पाइप लाइन डाली जाएगी। इसके अलावा एक और बदलाव किया जा रहा है। अब आयरन और सीमेंट के बजाय सभी जगह प्लास्टिक (एचडीपीई) की पाइप लाइन डाली जाएगी। निजी कॉलोनियों को भी इस नियम को फॉलो करना होगा।
सूत्रों का कहना है कि नगर निगम को आयरन व सीमेंट की पाइप लाइन को 10-15 साल बाद बदलना था। जबकि केंद्र ने शहरों में सीवेज और पानी की पाइप लाइन बदलने के लिए अमृत-1 और अमृत 2.0 योजना लॉन्च की थी। इसमें निकायों को पुरानी पाइप लाइन बदलने के लिए प्रस्ताव देना था। कटनी नगर निगम ने कुछ प्रस्ताव भेजे तो, लेकिन इनमें काम आगे नहीं बढ़ सका। नगर निगम सीमा में शामिल कुछ क्षेत्रों में पाइप लाइन के विस्तार का काम हुआ तो प्लास्टिक की ही पाइप लाइन डाली गई लेकिन 1964 में कटाएघाट में स्थापित हुए जल शोधन संयत्र और फिल्टर प्लांट से निकली पाइप लाइन आज भी काम कर रही हैं। मेन पाइप लाइन से कनेक्ट कर शहर के लगभग 22 वार्डों में बिछाई गई सबलाइन भी उस दौर में कहीं आयरन और कहीं सीमेंट युक्त चीनी मिट्टी की है। आधे शहर में तो फिल्टर प्लांट या सिटी सप्लाई का पानी पहुंच रहा है जबकि आधे शहर की जनता टयूबवेल के पानी के भरोसे हैं। जल सप्लाई सिस्टम के बाद बोरिंग का पानी पहले टंकियों में स्टोर होता है इसके बाद वार्डों में सप्लाई की जाती है। इसी तरह सिटी सप्लाई के पानी को भी स्टोर करने के लिए नगर निगम ने शहर के चारों दिशाओं में टंकियों का निर्माण कराया है।
साफ नहीं होती टंकियां, पाइप लाइन भी पुरानी
इस पूरे सिस्टम में कई खामियां भी हैं, मसलन कई जगह सप्लाई लाइन बड़े नाले और नालियों के बीच से होकर गुजरती है, जबकि कई जगह रख रखाव के अभाव में लीकेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। लाइन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी गंदा पानी सप्लाई होने लगता है। कई वार्डो में ऐसी शिकायतें सुनी भी गई। उधर विडंबना यह भी है कि नगर निगम द्वारा बड़ी पानी टंकियों की सफाई में भी हीलाहवाली बरती जाती है, जबकि इन टंकियों की नियमित सफाई होना चाहिए। इन्हें ब्लीचिंग पाउडर के माध्यम से क्लीन किया जाता है। फिल्टर प्लांट में पानी के शुद्धिकरण के लिए फिटकरी का उपयोग होता है। नगर निगम के कर्मचारी इसमें भी कमीशनखोरी की जुगत बिठाते रहते हैं और टंकियों की सफाई में औपचारिकता की पूर्ति की जाती है। ये तमाम लापरवाही भी दूषित जल की सप्लाई का कारण बनती है।
प्लास्टिक पाइप लाइन की लाइफ 35 से 50 साल
सूत्र बताते हैं कि प्लास्टिक की पाइप लाइन की लाइफ 35-50 साल के लिए और आयरन की पाइप लाइन की लाइफ 10 से 12 साल होती है। आयरन होती है, जबकि सीमेंट की पाइप लाइन शहरों में उस समय डाली गई थी, जब पीएचई के पास पानी सप्लाई और सीवेज नेटवर्क का जिम्मा था।
पुरानी कॉलोनियों में हैं आयरन, सीमेंट की पाइप
शहर की पुरानी बसाहट वाले क्षेत्रों और कॉलोनियों में सीमेंट और आयरन की की ही पाइप लाइनें लगाई गई हैं, क्योंकि 20 साल पहले न तो प्लास्टिक पाइप लाइन लगती थी और न ही बाजार में इनकी सप्लाई थी। कई जगह यह पाइप लाइनें नालों से होकर गुजरती है, जिससे पाइप लाइन टूटी होने के कारण नाले और पीने का पानी आपस में मिलते रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक विभाग के स्तर पर पाइप लाइनों की सर्वे रिपोर्ट बुलाई गई है, इनकी रिपोर्ट के आधार पर नया नेटवर्क तैयार होगा। आयरन और सीमेंट की पाइप लाइन की जगह पर प्लास्टिक (एचडीपीई) की लाइनें डाली जाएंगी। इनकी ड्यूरेबिलिटी ज्यादा होती है, लीकेज होने पर इन्हें आसानी से दुरूस्त किया जा सकता है।








